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कॉमर्शियल माइनिंग के फैसले में केंद्र ने दिखायी जल्दबाजी,  फैसले के खिलाफ SC का खटखटाया दरवाजा : हेमंत

मुख्यमंत्री ने कहा, अभी व्यापारियों के एक समूह ने देश को जकड़ ऱखा है

Ranchi  :  आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निजी क्षेत्र के लिए 41 कोल ब्लॉक्स की नीलामी की प्रक्रिया पर हेमंत सरकार ने सख्त नाराजगी जतायी है. नीलामी प्रक्रिया को लेकर मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए सीएम ने कहा कि देश के व्यापारियों के समूह ने देश को पूरी तरह से जकड़ लिया है. पूरी दुनिया अभी कोरोना वायरस की जद में है.

लॉकडाउन के कारण विदेशी निवेश भी पूरी तरह से अभी बंद है. स्थानीय समस्या अभी भी बनी है. उद्योग-धंधों की स्थिति किसी से छिपी नही है. कोयले की मांग पूरी तरह से ठप है. ऐसे में मोदी सरकार ने जल्दबाजी दिखाते हुए कोल ब्लॉक की नीलमी की प्रक्रिया शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि केंद्र के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है. दाखिल अर्जी में सरकार ने इस नीलामी पर रोक लगाने की मांग की है.

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कोयला खदानों का नहीं मिलेगा उचित मूल्य

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प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति को देखने से साफ है कि इससे राज्य को किसी तरह का कोई फायदा नहीं मिलेगा. न ही कोयला खदानों का उचित मूल्य मिलेगा. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून को कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी.

इन कोल ब्लॉक्स की नीलामी से देश में कोल ब्लॉक्स की कॉमर्शियल माइनिंग की शुरुआत होगी. केंद्र सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी. जिन कोयला खदानों की नीलामी होने वाली है, उनमें से कई झारखंड में हैं.

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राज्य सरकार को कॉन्फिडेंनेस में लेना चाहिये

हेमंत ने कहा कि नीलामी की प्रक्रिया बहुत ही अहम निर्णय है. ऐसा करने से पहले राज्य सरकार को भी कॉन्फिडेंस में लेने की आवश्यकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि खनन का विषय राज्य में हमेशा से एक ज्वलंत मुद्दा रहा है. मोदी सरकार के इस फैसले में रैयतों की जिंदगी का ख्याल नहीं रखा गया है. कोयला खदानों के व्यवसायिक खनन से आदिवासियों की जिंदगी प्रभावित होगी.

उन्होंने कहा कि केंद्र के नीलामी के फैसले से इन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के रैयतों और स्थानीय लोगों को इस खनन में अभी तक अधिकार नहीं मिला है. अभी भी बड़े पैमाने पर विस्थापन की समस्या उलझी हुई है. इसे लेकर लगभग सभी मजदूर संगठन सड़कों पर है. लेकिन इसके निदान की जगह केंद्र ने नीलामी की प्रक्रिया लाकर फिर से हमें पुरानी व्यवस्था की ओर ढकेलना शुरू कर दिया है.

10 लाख लोगों को रोजगार देने की दिशा में सरकार कर रही काम

हेमंत ने कहा कि पहले ही राज्य सरकार ने केंद्र से इस मामले में जल्दबाजी नहीं करने का आग्रह किया था. जब केंद्र के तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला, तो सरकार ने यह कदम उठाया है. हेमंत ने कहा कि केंद्र को पहले यह राज्यव्यापी सर्वे कराना चाहिए था कि खनन से स्थानीय लोगों को कितना फायदा हुआ है.

इस दौरान सीएम सोरेन ने प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने की बात को अपनी सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य बताया. उन्होंने कहा कि राज्य में 10 लाख लोगों को रोजगार देने की दिशा में सरकार काम कर रही है. इसके लिए सरकार बंद पड़े उद्योगों को कैसे खोला जाए, इसपर भी समीक्षा कर रही है.

बिहार चुनाव को देख लायी गयी है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना

केंद्र द्वारा शुरू किये गये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को लेकर हेमंत सोरेन ने कहा कि योजना सिर्फ बिहार चुनाव को देखकर लायी गयी है. उन्होंने कहा कि योजना में केंद्र ने केवल तीन जिलों का चयन किया है. जबकि राज्य सरकार पहले से ही प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने की दिशा में काम कर रही है.

पहल केवल तीन जिलों के लिए शुरू हुई है. हेमंत ने कहा कि एक माह पहले से चल रही इस पहल में करीब 6 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है. सरकार जल्द ही और लोगों को इसमें जोड़ेगी.

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