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पर्यावरण बचाने की शपथ के साथ कला और साहित्य का उत्सव बेतला महोत्सव का समापन

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PALAMU:  प्रतिभागियों के बीच प्रशस्ति पत्र वितरण के साथ कला और साहित्य का उत्सव ‘बेतला महोत्सव’ का शानदार समापन रविवार को बेतला नेशनल पार्क में हो गया. महोत्सव पिछले 15 दिसम्बर से चला आ रहा था. एक माह से अधिक समय तक चले इस कार्यक्रम में कलाकारों, साहित्यकारों व सामाजिक चिंतकों का मेला लगा रहा. विभिन्न सांस्कृतिक व वैचारिक परिचर्चाओं के साथ कवि सम्मेलन मुशायरा का आयोजन किया गया. राष्ट्रीय स्तर के नाट्य दल ‘सहर’ के कलाकार सहित अन्य कलाकारों ने अपनी कला से लोगों को रू-ब-रू कराया. नई संस्कृति सोसायटी , इप्टा, पंचम आर्ट, अंशु आर्ट, कशिश आर्ट, राजबाड़ी आर्ट, लोकगीत व लोक नृत्य के कलाकार शामिल हुए. चित्र प्रतियोगिता, नाट्य प्रतियोगिता व परिचर्चा का आयोजन हुआ.

समापन समारोह में हुआ पौधारोपण

समापन समारोह में बेतला महोत्सव कमिटी से जुड़े लोगों ने बेतला परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन के संकल्प को दोहराया. महोत्सव का समापन बेतला परिसर में ही पर्यावरण संरक्षण काव्य गोष्ठी से किया गया. मुख्य अतिथि वन पदाधिकारी कुमार मनीष अरविंद ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण है, तभी मानव जीवन है. पर्यावरण को बचाये बिना आनेवाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता है.

‘शिखर पर जिजीविषा’ का लोकार्पण

मौके पर कुमार मनीष अरविंद द्वारा लिखित पुस्तक ‘शिखर पर जिजीविषा’ का लोकार्पण भी किया गया. यह पुस्तक पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में श्री अरविंद का एक प्रयास है.

कवि सम्मेलन में हुआ लोगों का मनोरंजन 

कवि सम्मेलन में स्थानीय कवि व शायरों ने अपनी रचनाओं को पढ़कर लोगों का खूब मनोरंजन किया. साथ ही पर्यावरण को बचाए रखने का संदेश भी दिया. कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि हरिवंश प्रभात ने ‘एक पौधा तुम लगाओ, एक पौधा हम लगाएं’ प्रस्तुत किया, जबकि कुमार मनीष अरविंद ने ‘क्यों जंगल चुपचाप खड़ा है’ अपनी कविता का पाठ किया. कवि डॉ विजय प्रसाद शुक्ल ने ‘स्वच्छ हो पर्यावरण-शुद्ध वातावरण, हरीतिमा की इस धरा पर हो हमेशा आवरण’ सुनाया. युवा कवियत्री प्रगति भारद्वाज ने ‘आज की यह नई सुबह बन जाए, कल की गहरी शाम’ सुनायी. इसके अलावे मो इफ्तेखार ने ‘कितना नासमझ हैं वह लोग जो उसी तट पर गंदगी फैलाते हैं,’ उमेश कुमार पाठक रेनू ने ‘मैं वृक्षों की खुशबू हूं खुशियों का जंगल, मुझे मत उजाड़ो, मैं हूं सबका मंगल,’  मोउद्दीन कुरेशी ने हर कदम पर ‘ए लोगों दुश्मनों का डेरा है, किस तरफ को जाएं हम चारो ओर अंधेरा है,’ सुषमा श्रीवास्तव ने ‘चलो बांस संग हम भी गाएं, बंसी, डलिया, सूप बनाएं ’ और शीला श्रीवास्तव ने ‘प्राकृतिक आपदा ने मानव को चांद दिलाया, कि तुम कितना भी आगे बढ़ जाओ गिरफ्त में ही रहोगे हमारे’ अपनी रचना सुनायी.

आयोजन से जुड़े साथियों का आभार प्रकट किया

कार्यक्रम के अंत में बेतला महोत्सव के संयोजक राजेश पाण्डेय ने पूरे आयोजन में जुड़े साथियों और सहयोगियों के प्रति दिल से आभार प्रकट किया. मौके पर प्रेम भसीन, राजीव चैहान, फरहीन, अंकित जाला पाण्डेय, अजीत पाठक, शालिनी श्रीवास्तव, वंदना श्रीवास्तव, आशा शर्मा, इप्टा के उपेन्द्र मिश्रा, दिनेश शर्मा, रवि शंकर, समरेश सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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