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सीसीएल ने वाहनों की जीपीएस आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की, कोयला चोरी रोकने में मिलेगी मदद

Ranchi: सीसीएल ने वाहनों की ट्रैकिंग को लेकर जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) व्यवस्था लागू कर दी है. इससे कोयले की ढुलाई से लेकर, उसके मापने तक के सिस्टम को जीपीएस आधारित कर दिया गया है. सीसीएल के कायाकल्प मॉडल ऑफ गवर्नेंस की दिशा में यह कदम उठाया गया है. इससे कोयले की ढुलाई को पूरी तरह पारदर्शी कर दिया गया है. कोयले की ढुलाई से लेकर उसके कांटाघर तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया अब सीसीटीवी कैमरे में कैद होने लगी है. झारखंड में सीसीएल के सभी खदानों और कोल कमांड एरिया में इसे लागू कर दिया गया है. सीसीटीवी पर आधारित कांटा घर के चालू होने से कोयले की चोरी पर काफी हद तक काबू पाया गया है. सभी वाहनों और कांटाघरों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है. इस व्यवस्था से खदानों के जरिये कोयला साइडिंग तक पहुंचनेवाले कोयले पर नजर रखी जा रही है. कोल हैंडलिंग प्लांट पर भी इस ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी जा रही है. इससे कोयले का उत्पादन और डिस्पैच के आंकड़े भी मजबूत हो रहे हैं. जीपीएस सिस्टम से कोयले के उत्पादन और प्रेषण की रिपोर्ट भी आसानी से उपलब्ध हो रही है.

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कोयला मंत्री ने दिया था निर्देश

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सीसीएल प्रबंधन ने केंद्रीय कोयला और रेलवे मंत्री पीयूष गोयल के आदेश के बाद कोयला चोरी कम करने के लिए जीपीएस प्रणाली स्थापित की. केंद्रीय मंत्री ने कोयले के उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता बढ़ाने का भी निर्देश दिया था. उन्होंने खान प्रहरी नामक मोबाइल एप भी प्रभावी करने की बातें कहीं थीं. इसमें आम लोगों को जोड़ने का भी निर्देश केंद्रीय मंत्री ने दिया था, ताकि कोयले के प्रेषण पर नजर रखी जा सके. कोयले की चोरी के अलावा खदान क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सीसीएल की तरफ से तकनीक का उपयोग कर ई-निविदा, कोल नेट, बिल टै्रकिंग और अन्य व्यवस्थाएं भी लागू की गयी हैं. कंपनी की तरफ से समेकित सुरक्षा भी लागू की जा रही है, ताकि उसे कोल हैंडलिंग प्लांट और रेलवे साइडिंग को जोड़ कर उसका मासिक रिपोर्ट तैयार की जा सके.

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सैटेलाइट से नियंत्रित होता है जीपीएस

जीपीएस व्यवस्था को सैटेलाइट से नियंत्रित किया जाता है. जीपीएस ट्रैकिंग से वाहनों के वास्तविक स्थान का भी पता लगाया जा सकता है. रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेश्न (आरएफआइडी) व्यवस्था से वाहनों की सूचना भी ली जाती है. सीसीएल में 112 आरएफआइडी स्थापित की गयी है. सीसीटीवी से 112 कांटाघरों को भी जोड़ा गया है. वेब आधारित जीआइएस व्यवस्था से कोल कमांड एरिया का नक्शा भी देखा जा सकता है. यदि किसी वाहन द्वारा रूट का उल्लंघन किया जाता है, तो इसके मोबाइल एप से तुरंत अलर्ट भी जारी हो जाता है. वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम स्पीड भी तय कर दी गयी है.

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