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10वीं-12वीं के विद्यार्थियों को कम मार्क्स के लिए सीबीएसई जिम्मेवारः पासवा

Ranchi: प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) का कहना है कि 10वीं और 12वीं क्लास का परिणाम संतोषजनक नहीं होने के पीछे पूरी तरह से सीबीएसई बोर्ड द्वारा लिया गया फैसला जिम्मेवार है. पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि विद्यालयों पर सीबीएसई द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार ही अंक प्रदान करने का दबाव था. सीबीएसई बोर्ड द्वारा सभी विद्यालयों को पहले ही विषयवार अंक प्रदान कर उनके अधिकार को सीमित कर दिया गया. इससे विद्यालय सीमित संख्या में अंक देने पर विवश थे.

दूबे ने कहा सीबीएसई के द्वारा एक तय संख्या में बच्चों को अंक देने के कारण नियमित विद्यालय ने ऐसा किया. अब अगर छात्रों की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया गया तो इसका संपूर्ण दोष सीबीएसई पर ही जाता है ना कि विद्यालय पर. वैसे विद्यालय जिनका विगत 3 वर्षों का प्रदर्शन अच्छा था उन पर भी कम अंक देने का सीबीएसई का दबाव था.

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Sanjeevani

बच्चों को 85 प्रतिशत से ऊपर अंक दें

पासवा अध्यक्ष ने सीबीएसई के चेयरमैन से मांग की है कि 10वीं एवं 12वीं के बच्चों को 85 प्रतिशत से ऊपर अंक देकर उन बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार होने से बचाएं. अन्यथा किसी बच्चे के साथ कोई घटना दुर्घटना होती है एवं स्कूल संचालकों के साथ भी किसी प्रकार की घटना होती है तो इसकी सारी जिम्मेदारी सीबीएसई की होगी.

जैक बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम पर विद्यार्थियों के हो रहे हंगामे के संबंध में आलोक दूबे ने कहा कि तत्काल इस संबंध में जैक बोर्ड के अध्यक्ष को हठधर्मिता छोड़ते हुए अभिभावकों एवं बच्चों से बातचीत कर रास्ता निकालना चाहिए.

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कई स्कूलों में कोरोना गाइडलाईन का हो रहा है उल्लंघन

इधर, झारखंड में कल से 9वीं से 12वीं क्लास तक की पढ़ाई ऑफलाइन शुरू होने पर आलोक कुमार दूबे ने कहा कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि रांची के संत जॉन्स और संत पॉल समेत कई स्कूलों में सोशल डिस्टेसिंग के आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है.

एक-एक क्लास में 40 से अधिक बच्चे बैठे नजर आये. इसलिए प्रबंधन से आग्रह है कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाए.

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