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Cbse 10th Result : स्कूलों ने शुरू की रिजल्ट बनाने की प्रक्रिया, जानिए कैसे तैयार हो रहा रिजल्ट

Ranchi : सीबीएसइ की ओर से लेटर जारी होने के बाद 10 वीं रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया स्कूलों की ओर से शुरू कर दी गयी है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन ने इस साल 10 वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं लेने का निर्णय लिया. इसके बाद 10 वीं बोर्ड रिजल्ट जारी करने को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई.

देश भर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रमुख से बैठक करने के बाद सभी स्कूलों को रिजल्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया. बोर्ड की ओर से 10वीं बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए मूल्यांकन का फॉर्मूला तैयार कर लिया है. इसके लिए बोर्ड ने स्कूलों को 18 पेज का नोटिफिकेशन भेजा है. जानिए रिजल्ट बनने की पूरी प्रक्रिया…क्या होगा कैसे हो रहा.

मूल्यांकन कमेटी की भूमिका अहम

10वीं के रिजल्ट तैयार करने के लिए स्कूल को पांच सदस्यीय शिक्षकों की कमेटी का गठन करना है़. इस कमेटी में विद्यार्थियों की ओर से चुने गये पांच मुख्य विषय के शिक्षक शामिल होंगे. प्राचार्य चेयरपर्सन रहेंगे. इसके अलावा दो दूसरे स्कूल के विषय शिक्षक और दो सीबीएसइ के प्रतिनिधि का रहना जरूरी है. दूसरे स्कूल और सीबीएसइ प्रतिनिधि को विद्यार्थियों के पारदर्शी मूल्यांकन के लिए जोड़ा जायेगा. राज्य के सीबीएसइ ने इस कमिटी का गठन कर लिया है और इसकी जानकारी बोर्ड को दे दी है.

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ऐसे होगा अंकों का विभाजन

100 अंक के पेपर में 20 अंक स्कूल की ओर से इंटरनल असेसमेंट के तर्ज पर दिये जायेंगे. इसका डेटा स्कूल को 11 जून तक सीबीएसइ की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा. वहीं बोर्ड परीक्षा के लिए निश्चित 80 अंक मूल्यांकन कमेटी की ओर से दी जायेगी. मार्किंग स्कूल के फॉर्मूला के तहत विद्यार्थी को 10 अंक पीरियोडिक टेस्ट या यूनिट टेस्ट के आधार पर दिया जायेगा़ अर्द्धवार्षिक या फर्स्ट टर्म परीक्षा से 30 अंक और प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर 40 अंक दिये जायेंगे.

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जानिए मार्किंग का गणित

स्कूल को अपने तीन वर्ष के 10 वीं बोर्ड के रिजल्ट में किसी एक शैक्षणिक सत्र को 2020-21 के मूल्यांकन का आधार बनाना है. स्कूल चाहें तो शैक्षणिक सत्र 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में से किसी एक साल के रिजल्ट को आधार बना सकता है. सीबीएसइ की ओर से सभी साल के रिजल्ट का अधिकतम अंक फीसदी में तय किया है. शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए यह 72 फीसदी, सत्र 2018-19 के लिए 74 और 2019-20 के ओवरऑल रिजल्ट के लिए 71 फीसदी अंक तय किया गया है.

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इसमें स्कूल अगर शैक्षणिक सत्र 2017-18 को अपना आधार बनाता है, तो ओवरऑल रिजल्ट का 72 फीसदी अंक ही मान्य होगा. ऐसे में स्कूल विद्यार्थी को 80 में अधिकतम 76 से 77 अंक ही दे सकेंगे. ऐसे में पांच विषय के अंकों के विभाजन में विद्यार्थी को मैथ में सर्वाधिक 77 अंक, साइंस में 75, सोशल साइंस में 70, इंग्लिश में 72 और हिंदी में 74 अंक दिये जायेंगे.

जबकि विद्यार्थी का ओवरऑल प्रदर्शन बेहतर तीन विषयों के अंक पर तय होगा. वहीं छठे विषय के तौर पर विद्यार्थी को अगर कंप्यूटर एप्लिकेशन विषय दिया गया है, तो उसका मूल्यांकन बेहतर तीन विषयों के अनुपात से 50 को गुणा कर 80 अंक से भाग देकर कुल तय अंक हासिल करना होगा.

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