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सीबीआइ ने उपभोक्ता भंडार में की छापेमारी, चार घंटे की पूछताछ के बाद सचिव और लिपिक को लिया हिरासत में

Dhanbad : सीबीआइ की टीम ने बुधवार को भौरा कोलियरी कर्मचारी सहकारी उपभोक्ता भंडार में छापामारी की. इस दौरान सीबीआइ के अधिकारियों ने उपभोक्ता भंडार के सचिव चंदेशवर सिंह व लिपिक जगत सिंह से करीब चार घंटे तक पूछताछ  की.

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शाम को चार बजे टीम सचिव चंदेशवर सिंह व लिपिक जगत सिंह को अपने साथ धनबाद लेकर चली गयी. सीबीआइ के एक अधिकारी से मामले के बारे में पत्रकारों ने जब पूछा तो उन्होंने कहा कि टीम अभी तक सचिव व अन्य पर लगे आरोप की जांच में पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो पायी है. इसलिए अधिक जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है. सचिव चंदेश्वर सिंह भौंरा नार्थ कोलियरी के सेवन बी बंद खदान में हाजिरी लिपिक के पद पर पदस्थापित हैं.

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हो रही है कई तरह की बातें

सीबीआइ की इस कार्रवाई को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं. हाल के दिनों में सीबीआइ ने कई कार्रवाइयां की हैं. इस कार्रवाई को भी कोयले के कारोबार से जोड़ कर देखा जा रहा है.

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जुलाई में जीनागोरा एटी देवप्रभा एफ पैच परियोजना में कोल शॉर्टेज के मामले में बीसीसीएल के दो जीएम समेत अधिकारियों व चर्चित ठेकेदार एलबी सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी.

बीसीसीएल के लोदना क्षेत्र में हुई छापेमारी के दौरान सीबीआइ टीम सर्वे विभाग के दो अधिकारियों निर्मल मंडल और अनूप महथा को साथ ले गयी थी.

बीसीसीएल के जीएम सीएसआर कल्याणजी प्रसाद, जीएम एचआरडी प्रकाश चंद्रा, मैनेजर एके पांडेय व अन्य दो अधिकारियों के अलावा एटी देवप्रभा कंपनी के संचालक एलबी सिंह के ठिकानों पर तड़के ही सीबीआइ ने दबिश दे दी थी.

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लोदना में भी दो लोग लिये गये थे हिरासत में

लोदना क्षेत्र की जीनागोरा एटी देवप्रभा एफ पैच आउटसोर्सिंग परियोजना में दो वर्ष पूर्व हुए कोल स्टॉक शॉर्टेज मामले में विजिलेंस टीम की रिपोर्ट के बाद सीबीआइ टीम ने आरोपित अधिकारियों के आवास और कार्यालयों में छापेमारी की थी.

सर्वे विभाग के अधिकारी निर्मल मंडल और अनूप महथा को टीम अपने साथ ले गयी. विजिलेंस जांच में लोदना क्षेत्र के निवर्तमान पीओ सह जीएम कल्याणजी प्रसाद, पूर्व जीएम पी चंद्रा, प्रबंधक एके पांडेय, पूर्व क्षेत्रीय सर्वे अधिकारी निर्मल मंडल, सेवानिवृत्त एजीएम बीएन सिंह, सर्वे कर्मी अनूप महथा समेत सात कोल अधिकारियों को आरोपित किया गया था. एटी देव प्रभा को भी दोषी ठहराते हुए मामला सीबीआइ को सौंपा गया था.

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