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पिपरवार गोलीकांड की हो सीबीआई जांच: हाईकोर्ट

कोर्ट ने पूजा पाल बनाम केंद्र सरकार मामले का दिया हवाला

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Ranchi: हाईकोर्ट ने पिपरवार गोली कांड मामले की जांच सीबीआइ से कराने के आदेश दिये हैं. कोर्ट ने आदेश की कॉपी गृह विभाग के सचिव, सीबीआइ निदेशक और डीजीपी को भी भेज दी है. इस मामले में कोर्ट ने पूजा पाल बनाम केंद्र सरकार केस का हवाला दिया है.

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बता दें कि पिपरवार थाना के एएसआइ विनोद कुमार सिंह, सिपाही प्रेम कुमार मिश्र, रवि राम सहित पांच पुलिस कर्मी ने अब्दुल जब्बार के पुत्र मो. सलमान के घर जाकर पूछताछ की थी. घर से बाहर निकलने पर पुलिस ने मो. सलमान को पकड़ लिया और गोली मार दी. उसके बाद परिजनों ने मो. सलमान को हॉस्पीटल ले गये, जहां उसे मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद सलमान के पिता मो. जब्बार ने पिपरवार थाने में मामला दर्ज कराया था.

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कोर्ट ने जमानत याचिका की रद्द

पिपरवार गोली कांड के आरोपियों ने कोर्ट में जमानत की याचिका दी थी, जिसे रद्द कर दिया गया. आरोपी ने जमानत के लिए दायर हलफनामे में कहा कि दुर्घटनावश फायरिंग हो गई. औरआइपीसी की धारा 304 के तहत जमानत दी जाए. लेकिन केस डायरी व जांच रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका रद्द कर दी. उसी समय कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने का का आदेश दिया. पोस्मार्टम रिपोर्ट में भी मो. सलमान के शव पर गोली के निशान पाये गये.

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बचाव में पुलिस की क्या थी दलील

पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि ट्रक लूटपाट की घटना को रोकने के क्रम में दुर्घटनावश फायरिंग हुई थी. इसी की जांच के लिए पुलिस मो. सलमान के घर गये थे. और घर से बाहर निकलने के क्रम में बकझक हुई और गोली चल गई. पुलिस ने पूरे मामले में अपनी ओर से कोई एफआइआर भी नहीं की. वहीं प्रत्यक्षदर्शियों ने गवाही दी कि पुलिस ने गोली चलाई. इंसास राइफल से गोली चली थी.

सीआइडी की रिपोर्ट में गोली चलने की पुष्टि

सीआइडी की केस डायरी में भी इंसास राइफल से गोली चलने की पुष्टि की गई है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि पुलिस ने यह भी नहीं बताया कि दो गोली क्यों मारी गई. जबकि घटना स्थल से खोका भी बरामद हुआ. सीआइडी इंस्पेक्टर मुमताज अली अहमद की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने ही गोली चलाई. जो एंकाउंटर नहीं है. यह दुर्घटना वश फायरिंग नहीं है. मुंशी की डायरी में पेट्रोलिंग का भी जिक्र नहीं है. पुलिस और सीआइडी की रिपोर्ट से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा है.

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मजिस्ट्रेट जांच में यह बात सामने आई कि यह जानबूझ कर की गई फायरिंग थी. इस घटना पर एफआइआर भी दर्ज नहीं हुई. ना ही घायल को अस्पताल ही पहुंचाया गया.

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