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जिस सीयूजे भवन के निर्माण की हो रही CBI जांच, उसका उद्घाटन करेंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

Ranchi: जिस सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड का उद्घाटन करने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रांची आ रहे हैं, उस यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण को लेकर सीबीआइ अदालत में केस चल रहा है.

25 नवंबर 2014 को सीबीआइ ने मामले को लेकर केस रजिस्टर कर सीबीआइ ने एक साथ रांची, गढ़वा, नयी दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई, अहमदाबाद और शिलौंग में छापेमारी की थी.

सीबीआइ को शिकायत मिली थी कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण को लेकर अनियमितता बरती गयी है. इसके बाद सीबीआइ ने केस दर्ज किया था. सीबीआइ ने उस वक्त प्रेस रिलीज जारी कर कहा था कि सीबीआइ ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड को लेकर के दो मुकदमे दर्ज किये हैं.

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भवन निर्माण को लेकर अनियमितता

यूनिवर्सिटी के वीसी डीटी खटिंग, प्रोजेक्ट के ओएसडी, तीन पब्लिक सर्वेंट अधिकारियों और 16 निजी संस्थान के खिलाफ केस दर्ज किया गया. मामला भवन निर्माण को लेकर नौ करोड़ रुपये की अनियमितता को लेकर है. दर्ज केस में जो धाराएं लगायी गयीं हैं उनमें 120B, 420, 468 और 471 शामिल हैं.

आगे सीबीआइ ने कहा है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण के मास्टर प्लान, ऑर्किटेक्चर डिजाइन और टेंडर को लेकर कई तरह के आरोप हैं. ये सभी अमियमितता 2010 से लेकर 2014 के बीच की गयी है.

अभी तक मामले में सीबीआइ की तरफ से क्लीन चिट नहीं दी गयी है. बावजूद इसके भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से कराया जा रहा है.

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हमें सीबीआइ की तरफ से एनओसी मिल गयी हैः वीसी 

डॉ नंद कुमार यादव, वीसी, सीयूजे.

इस मामले पर न्यूज विंग से सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. नंद कुमार यादव (इंदू) ने कहा कि जो मामला सीबीआइ में है वो भवन निर्माण को लेकर नहीं है. मामला टेंडर को लेकर है. यह मामला 2014 का है, जो काफी पुराना है. सीबीआइ की क्लिनचीट मिलने में तो 25 साल लगेंगे. जिन लोगों पर मामला है उन पर ट्रायल चल रहा है.

सीबीआइ ने कभी बिल्डिंग को टेकओवर नहीं किया. कभी बिल्डिंग का इंस्पेक्शन नहीं किया. सीबीआइ ने जो फाइंड आउट दिया है उसमें कहा है कि कंपनियों ने विवि के अधिकारियों के साथ मिल कर टेंडर में भ्रष्टाचार किया है. हमने इस मामले को लेकर लीगल ओपिनियन लिया है. सीबीआइ से एनओसी भी ली है.

एनओसी के मुताबिक हम काम करा सकते हैं. इसमें किसी तरह की कोई बात नहीं है. जो कंपनी निर्माण कर रही है, उसने जितनी अधिक राशि ली है, हम उतना पैमेंट नहीं करेंगे. ऐसा नहीं है कि हम सीबीआइ के क्लीन चीट मिलने तक काम नहीं करायेंगे. कब तक विवि किराये के भवन में चलता रहेगा. ये सब कंफ्यूजन क्रियेट किया गया है सीबीआइ से.

जिन्होंने ऐसा किया है, वे राज्य की तीन करोड़ जनता को धोखा दे रहे हैं. ऐसे लोग विवि में दो नंबर का काम करना चाहते हैं. यह मामला तीन-साढ़े तीन करोड़ रुपये अतिरिक्त पेमेंट का मामला है. इसमें कुछ नहीं होगा.

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