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सीबीआई विवाद :  जस्टिस एनवी रमना भी हटे एम नागेश्वर राव केस से, कहा एक ही राज्य के हैं  

सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई से जस्टिस एनवी रमना ने भी खुद को अलग कर लिया है.

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 NewDelhi : सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई से जस्टिस एनवी रमना ने भी खुद को अलग कर लिया है. वे तीसरे जज हैं, जो इस सुनवाई से हटे हैं.  बता दें कि इससे पहले सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस एके सीकरी खुद को इस केस से अलग कर चुके हैं.  सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ कॉमन कॉज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एमएम शांतनागौदर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच ने इस पर सुनवाई की, लेकिन जस्टिस रमना ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. जस्टिस रमना की दलील थी कि नागेश्वर राव उनके राज्य से ही हैं और वे नागेश्वर की बेटी की शादी में भी गये थे. साथ ही कॉमन कॉज की ओर से दुष्यंत दवे ने कहा कि रजिस्ट्री को शुक्रवार को ही केस लिस्ट करने को कहा जाये. इस पर जस्टिस रमना ने कहा कि हम यह कैसे कह सकते हैं. यह रजिस्ट्री पर है कि वह कब सूचीबद्ध करे.

कामन कॉज ने एम नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती दी है

जान लें कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी. गैर सरकारी संगठन कामन कॉज ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति निरस्त करने का आग्रह किया था. प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून- 1946 की धारा 4 ए के तहत लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 में किये गये संशोधन में प्रतिपादित प्रक्रिया के अनुसार केंद्र को सीबीआई का नियमित निदेशक नियुक्त करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है. बता दें कि नागेश्वर राव की नियुक्ति उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की सिफारिश के आधार पर नहीं की गयी है. याचिका में कहा गया है कि नागेश्वर राव की नियुक्ति के मामले में इस समिति को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है और इस तरह से यह नियुक्ति गैरकानूनी तथा कानून में प्रतिपादित प्रक्रिया के विपरीत है.

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