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CBI विवादः मोनेट इस्पात नई दिल्ली के प्रमोटर के खिलाफ निदेशक ने नहीं की कार्रवाई

सीबीआइ के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के पत्र में है इसका जिक्र

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Ranchi: सीबीआइ के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच की खींचतान में कई घोटालों की परतें खुल रही हैं. सीबीआइ के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और समन्वय विभाग के सचिव को लिखे पत्र में कई खुलासे किये हैं. इनमें से कोल ब्लॉक आवंटन में किये गये गड़बड़ झाले का भी जिक्र किया गया है. पत्र में कहा गया है कि कैसे सीबीआइ निदेशक एके वर्मा ने मोनेट इस्पात नयी दिल्ली के मालिक पर किसी तरह की कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं ली.

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मोनेट इस्पात पर सीबीआइ की तरफ से कोल ब्लॉक आवंटन में आरोप लगा था. यहां यह बताते चलें कि मोनेट इस्पात कंपनी के कारखाने झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में हैं. झारखंड के रजरप्पा में कंपनी की कोल वाशरी भी है. कंपनी की ओर से झारखंड में निवेश करने के लिए सबसे पहला द्विपक्षीय समझौता भी खान एवं भूतत्व विभाग की तरफ से किया गया था. पर लौह अयस्क खदान नहीं मिलने से निवेश की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पायीं.

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मोनेट इस्पात के प्रमोटरों के कईयों के साथ थे बेहतर संबंध

मोनेट इस्पात के प्रमोटरों, मालिकों का संबंध कई आयकर अधिकारियों और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के साथ था. जब सीबीआइ की तरफ से मामले की जांच शुरू की गयी, तब निदेशक श्री वर्मा ने मामले पर किसी तरह की रूचि नहीं दिखलायी. इतना ही नहीं, आयकर और प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से मोनेट इस्पात के प्रमोटरों के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को सील करने, पासपोर्ट एक्ट के तहत लूक आउट सर्कुलर को खोलने और इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने में भी कोई अग्रेतर कार्रवाई नहीं की गयी.

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इतना ही नहीं सीबीआइ जांच की सभी जानकारियां, इनपुट और निगरानी के दावों की जानकारी भी आरोपियों तक पहुंचायी गयी. इससे जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गयी. इतना ही नहीं, सीबीआइ निदेशक की तरफ से यू-फ्लेक्स मामले में फोन टैपिंग और दस्तावेजों में हेराफेरी करने की बातें भी पुष्ट हुई हैं. सीबीआइ की तरफ से जब 2-जी स्पेक्ट्रम एलोकेशन घोटाले की जांच की जा रही थी. उस समय निदेशक की तरफ से 2015 और 2017 में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय को सेल्फ नोट भी भेजा गया था.

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