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 सीबीआई निदेशक का अरुण शौरी व प्रशांत भूषण से मिलना मोदी सरकार को नागवार गुजरा !

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का मिलना मोदी सरकार को रास नहीं आया है

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 NewDelhi : पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का मिलना मोदी सरकार को रास नहीं आया है. मेादी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सीबीआई निदेशक का नेताओं से मिलना असामान्य बात है. बता दें कि अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने चार अक्टूबर को सीबीआई निदेशक से मुलाकात की थी. दोनों ने आलोक वर्मा को कुछ कागजात सौंपे थे. बता दें कि शौरी मोदी सरकार के मुखर आलोचक माने जाते हैं, जबकि भूषण आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता हैं. जानकारी के अनुसार दोनों ने राफेल डील के तहत ऑफसेट करार में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार की जांच करने की मांग की.

मुलाकात के क्रम में    दोनों ने सीबीआई निदेशक से कहा कि कानून के अनुसार जांच शुरू करने के लिए सरकार की अनुमति ली जाये. दोनों का आरोप था कि राफेल डील में ऑफसेट करार वास्तव में अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस समूह की एक कंपनी के लिए कमीशन था.  हालांकि भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार का कहना है कि दसाल्ट द्वारा ऑफसेट सहयोगी के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं है .

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  सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का  विशेष निदेशक अस्थाना के साथ विवाद चल रहा है.

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सूत्रों के अनुसार यह शायद पहला मौका था, जब नेताओं ने सीबीआई निदेशक से उनके कार्यालय में मुलाकात की.  ऐसी मुलाकातें असामन्य बतायी गयी है. खबर यह भी है कि तीनों की मुलाकात से मोदी सरकार खुश नहीं है. वरिष्ठ अधिकारी ने  बताया कि सामान्य हालात कोई नेता जब सीबीआई निदेशक से मुलाकात का समय मांगता है, तब एजेंसी मुख्यालय के रिेसेप्शन में शिकायतें या अन्य दस्तावेज सौंपने को कहा जाता है.  बता दें कि मौजूदा सीबीआई निदेशक का कार्यकाल जनवरी 2019 तक है.

आलोक वर्मा का सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के साथ विवाद चल रहा है. बात यहां तक पहुंची है कि दोनों सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ आरोपप्रत़्यारोप लगा लगा रहे हैं. सीबीआई के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.  

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