न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
Browsing Category

Opinion

हमें अपनी जड़ों को सींचना होगा

Lalit Gargहम सब अच्छे जीवन, सफलता और शुभ-श्रेयस्कर होने की कामना करते हैं लेकिन जीवन तो उतार और चढ़ाव का खेल है. हम सभी कभी न कभी अवसाद और तनाव से आहत होते हैं, तो कभी दुःखों से हमारा साक्षात्कार होता है. दुःखों एवं पीड़ाओं का एहसास…

पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

Anit Singhलोकतंत्र के एक मजबूत स्तम्भ की साख आज दांव पर है. जी हां मैं बात कर रहा हूं पत्रकारिता की, जो एक महत्वपूर्ण कड़ी है सरकार और जनता के बीच.  समाज में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह जनता और सरकार के बीच सामंजस्य बनाने…

दिल्ली में किसानों की दस्तक से बढ़ा राजनीतिक तापमान

Faisal Anuragकिसान मुक्ति मार्च से एक बार फिर जाहिर हो गया है कि भारत के किसान और किसानी गहरे संकट में हैं. अन्नदाताओं का गुस्सा अब राजनीतिक रूप ग्रहण कर गया है. दिल्ली की सड़कों पर लगे नारे साफ बता रहे हैं कि किसानों की उपेक्षा केंद्र…

पारा शिक्षकों के सरकारीकरण में तकनीकी अड़चन हो सकता है पर पैसा देने में नहीं

Brajesh Singhपारा शिक्षकों की बहाली में सरकार द्वारा जो विज्ञापन पेपर में तथा विद्यालय में दिया गया था .उसमें स्थानीय महिला एससी,एसटी और ओबीसी के आरक्षण के अनुसार बहाल करना था. बहाली में सिर्फ ग्राम शिक्षा समिति ही नहीं थी, उसमें सचिव…

मोदी जी की 2019 की तैयारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर दागी को बैठाना

Girish Malviyaतीन राज्यों के चुनाव की गहमा-गहमी के बीच मोदीजी ने चुपके से सुनील अरोड़ा की नियुक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कर दी है और वही 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की जिम्‍मेदारी  संभालने वाले हैं. 2019 की तैयारी में…

अयोध्या: मीडिया 1992 की तरह एक बार फिर सांप्रदायिकता की आग में घी डाल रहा है

Krishna Pratap Singhउत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार की दो-दो ‘भव्य’, ‘देव’ व ‘दिव्य’ सरकारी दीपावलियों के बावजूद न तो अयोध्या में उस अभीष्ट ‘त्रेता की वापसी’ हुई और न विश्व हिंदू परिषद व शिवसेना…

छत्तीसगढ़ के दागी उम्मीदवारों के विज्ञापनों का अध्ययनः दाग ढूंढ़ते रह जाओगे

Sudhir PalRanchi: अखबार में छपने से क्या फर्क पड़ेगा- छत्तीसगढ़ में मतदाता जागरुकता अभियान के दौरान एक दागी उम्मीदवार ने ऐसा ही बयान दिया था. अखबार पढ़ता कौन है? और कितने लोगों को अखबार का विज्ञापन याद रहता है! अति आत्मविश्वास से लबरेज इस…

अमित शाह का पीछा करती फ़र्ज़ी एनकाउंटर की ख़बरें और ख़बरों से भागता मीडिया

Ravish Kumarनहीं छपने से ख़बर मर नहीं जाती है. छप जाने से अमर भी नहीं हो जाती है. मरी हुई ख़बरें ज़िंदा हो जाती हैं. क्योंकि ख़बरें मैनेज होती हैं, मरती नहीं हैं. बस ऐसी ख़बरों को ज़िंदा होने के इंतज़ार में अपने किरदारों के आस-पास…

देखें कि ‘आपकी न खाऊंगा न खाने दूंगा’ वाली बात में कितनी सच्चाई है?

Girish Malviyaआइए प्रधानमंत्री जी अब जरा अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और अपने केंद्रीय मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी को बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाइये. उनके कारनामे आज सीबीआइ के डीआईजी रैंक के अफसर सामने लाये हैं और डीआईजी…

जेट एयरवेज पर इस वक्त 9430 करोड़ रुपए का कर्ज है! …क्या कोई बतायेगा कि जेट एयरवेज को मोदी…

Girish Malviyaक्यों मोदी जी जेट एयरवेज को बचाने में पर्सनल इंटरेस्ट ले रहे हैं ? क्या जेट एयरवेज कोई सरकारी कम्पनी है? और सरकारी संपत्ति एयर इंडिया की तो संपत्ति तक टुकड़े-टुकड़े करके बेचने की योजना है, लेकिन जेट का एक साथ ही पूरा सौदा…