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पेयजल विभाग की नियुक्तियों में गाइडलाइंस के उल्लंघन का मामला, RTI से मिली सूचनाओं को भी ठेंगा

Ranchi: रांची जिले के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में जारी नियुक्ति प्रक्रिया संदिग्ध नजर आ रही है. इस संबंध में आरटीआई से मिली सूचनाओं को भी दरकिनार किए जाने की शिकायत आयी है. शर्तों के मुताबिक मैट्रिक, इंटर की परीक्षा झारखंड से पास किया जाना अनिवार्य किया गया था. इस संबंध में पूर्व में कार्मिक विभाग (झारखंड) के स्तर से भी निर्देश जारी हुए थे. पर विभिन्न पदों के लिए ऐसे नाम सामने आए हैं जिन्होंने दूसरे राज्यों से स्कूली पढ़ाई पूरी की है. IEC कॉर्डिनेटर, MIS कॉर्डिनेटर के पदों के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (रांची वेस्ट डिवीजन) की ओर से जारी लिस्ट में कई ऐसे नाम हैं जिन पर विवाद गहरा रहा है. इसमें विपुल सुमन, संतोष कुमार और आशुतोष कुमार जैसे नाम शामिल हैं. फिलहाल नियमों के उल्लंघन का मसला विभागीय मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर और विभागीय अधिकारियों तक पहुंच चुका है.

आरटीआई में मिला फर्जीवाड़ा

चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है कि संतोष कुमार (पिता-प्रभू नाथ शाह) का नाम भी IEC कॉर्डिनेटर के अलावा MIS  कॉर्डिनेटर की लिस्ट में रखा गया है. उनका स्कूली सर्टिफिकेट (मैट्रिक, इंटर) दूसरे राज्य से है. इनके मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट आकाश रंजन ने आरटीआई का उपयोग किया था. इस आधार पर संतोष कुमार के प्रमाण पत्र को फर्जी बताया जा रहा है. इसी तरह मेरिट लिस्ट में शामिल विपुल सुमन (पिता- शंभू नंदन प्रसाद) का नाम EC कॉर्डिनेटर के अलावा MIS  कॉर्डिनेटर के तौर पर भी लिस्ट में रखा गया है. उनका मैट्रिक और इंटर पास का सर्टिफिकेट झारखंड से नहीं, बिहार से है. आशुतोष कुमार (पिता- अलखदेव प्रसाद श्रीवास्तव) का भी नाम दोनों पदों के लिए लिस्ट में रखा गया है. इनका एकेडमिक सर्टिफिकेट भी दूसरे राज्य का है. इसके अलावा और भी कुछ नाम संदेह के दायरे में है.

विभाग के पास पहुंचा मामला

मेरिट लिस्ट में शामिल कैंडिडेटों के लिए (एमआईएस कॉर्डिनेटर के लिए 16, आइइसी कॉर्डिनेटर के लिए 19 और एसबीएम सह एसएलडब्लूएम कॉर्डिनेटर के लिए 7 कैंडिडेट) बीते 28 सितंबर को एक टेस्ट का आयोजन किया गया था. अब इंटरव्यू के आधार पर उन्हें चुने जाने की तैयारी है. परीक्षा में ही शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि पेयजल विभाग में वर्षों से जमे कॉन्ट्रैक्टकर्मी ही नियुक्ति प्रक्रिया की कमान संभाल रहे हैं. उनके प्रभाव के सामने कार्यपालक अभियंता भी लाचार हैं. रांची जिले के डीसी और डीडीसी नियुक्ति के इस गड़बड़झाले से अनजान हैं. लातेहार और धनबाद जैसे जिलों में बाहरी अभ्यर्थियों का मामला सामने आने पर उनके आवेदन को खारिज किया जा चुका है पर रांची में ऐसा अब तक नहीं हुआ है. फिलहाल कई अभ्यर्थियों ने इस मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पेयजल स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर तथा विभागीय सचिव से भी की है.

क्या कहता है विभाग

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (रांची वेस्ट डिवीजन), रांची के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शशि शेखर ने न्यूज विंग से कहा कि विभागीय प्रावधानों का पालन करते हुए सब हो रहा है. इधर उधर से नियुक्ति मामले पर कुछ सूचनाएं आयी हैं. अगर इस संबंध में ऊपर से विभागीय गाइडलाइन लिखित तौर पर आयेगा तो उसका अनुपालन किया जायेगा.

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