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CUJ के PhD सीटों पर विवि के शिक्षकों का कब्जा

Satya Prakash Prasad

Ranchi: केद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के पीएचडी सीटों पर देश के कोने-कोने से अभ्यर्थी आवेदन देते हैं. लेकिन, पीएचडी सीटों पर ज्यादातर यहां के सहायक प्राध्यापकों को कब्जा होता है. केंद्रीय विश्वविद्यालय संगठन द्वारा सीयूसीईटी (केंद्रीय विश्वविद्याल संयुक्त प्रवेश परीक्षा) के माध्यम से नामांकन प्रक्रिया विभिन्न कोर्स में किया जाता है.

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पिछले चार सालों से झारखंड के केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी की सीट पर यहां के प्राध्यापकों का कब्जा बना हुआ है. सीयूजे में पीएचडी की सीटें कम हैं. इस वजह से झारखंड के स्थानीय छात्र यहां ज्यादा आवेदन करते हैं. लेकिन, पीएचडी में चयन की जो प्रक्रिया है. उससे यहां के स्थानीय छात्रों को पीएचडी कोर्स का लाभ नहीं मिल रहा है.

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क्या है मामला

पीएचडी कोर्स में सीयूजे के शिक्षक ज्यादा निबंधन करा रहे हैं. लेकिन, स्थानीय छात्रों को पीएचडी कोर्स का लाभ नहीं मिल रहा है. सीयूजे के पत्रकारिता विभाग में दो सहायक शिक्षक रेश्मी वर्मा एवं राजेश कुमार पीएचडी कोर्स में नामांकन लिये हैं. दोनों शिक्षक पीएचडी कोर्स में इनरोल हैं.

पत्रकारिता के लिए पीएचडी कोर्स में मात्र दो सीट सीयूजे के द्वारा निर्गत की गयी है. ऐसे में इन शिक्षकों  के कारण समान्य छात्रों का पीएचडी में नामांकन नहीं हो पाता है. इसी तरह से एजुकेशन, इंटरनेशनल रिलेशन, रसायनशास्त्र में जैसे विभागों में यहां के समान्य छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाता है.

शिक्षकों की लॉबी के कारण यहां के पीएचडी सीटों पर स्थानीय छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता है. प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए कई छात्रों का आरोप है कि जिस विभाग में जो विभागाध्यक्ष है. उसी के अनुरूप या ईद-गिर्द पीएचडी कोर्स में छात्रों का नामांकन होता है.

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यूजी एवं पीजी में नहीं होती सीटें फूल

सीयूजे के पीएचडी कोर्स में छात्रों के बहुत सारे आवदेन आते हैं, लिखित परीक्षा के माध्यम से सीयूजे में छात्रों का नामांकन स्क्रूटनी के माध्यम से किया जाता है. लेकिन, सीयूजे के यूजी एवं पीजी कोर्स की बात करें, तो बड़ी मुश्किल से सीयूजे में छात्र नामांकन लेते हैं. लगभग तीन से चार बार विश्वविद्यालयों को सीटें भरने के लिए कड़ी मशक्‍कत करनी पड़ती है. फिर भी सीयूजे के कई विभागों में यूजी एवं पीजी की सीटें खाली रह जाती हैं.

एक ओर यूजी एवं पीजी कोर्स में स्थानीय छात्रों की ज्यादा उपस्थिति रहती है, तो वहीं दूसरी ओर पीएचडी कोर्स में बाहरी छात्रों का दबदबा बना रहता है. ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या सीयूजे राज्य के स्थानीय छात्रों को शोध कार्य से वंचित तो नहीं कर रही है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मानें तो पीएचडी कोर्स में प्रवेश परीक्षा में नियमों के अनुरूप नामांकन लिया गया है. लेकिन, पीएचडी की लिस्ट देखें, तो उससे साफ स्पष्ट होता है कि इन लिस्ट में ज्यादात्तर बाहरी छात्रों का दबदबा है.

वहीं इस सवाल के जवाब में सीयूजे अधिकारियों का तर्क है कि सीयूजे एक केंद्रीय संस्थान है. इसलिए पूरे देश के छात्रों में जो बेहतर अंक लाता हैं. उसी को लिस्ट में शामिल किया जाता है.

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क्या कहते हैं पत्रकारिता विभाग एचओडी

पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ देवव्रत सिंह ने कहा कि विभाग के दो शिक्षक कुलपति के आदेश से पीएचडी कोर्स में शामिल किये गए हैं. कुलपति के आग्रह पर इन शिक्षकों को पीएचडी कोर्स में शामिल किया गया है. राजेश कुमार विश्वविद्यालय प्रशासन से शैक्षिणक अवकाश पर पीएचडी कोर्स कर रहे हैं. वहीं रेश्मी वर्मा भी शैक्षिणक अवकाश लेकर पीएचडी कोर्स करेंगी.

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