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तत्काल टिकट पर दलालों का कब्जा, पढ़ने के लिए बाहर जानेवाले छात्र खासे परेशान

स्लीपर क्लास के एक टिकट के लिए देने पड़ते है एक से डेढ़ हजार रुपए

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Ranchi: हटिया के तत्काल टिकट काउंटर पर इन दिनों दलालों का कब्जा नजर आता है. एकओर जहां इन दिनों कॉलेजों में नये सेशन की शुरुआत हो रही है. वही दूसरी ओर रांची से इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य कोर्सों में एडमिशन के लिए बाहर जाने वाले छात्रों को टिकट नहीं मिल रहा है. इसका फायदा टिकट दलाल उठा रहे हैं. छात्रों से एक टिकट पर एक से डेढ़ हजार रुपए तक ज्यादा लिये जा रहे हैं.

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स्लीपर क्लास की टिकट नहीं मिलने के कारण मजबूरी में छात्रों को ज्यादा पैसा देकर टिकट लेना पड़ता है. सबसे ज्यादा टिकट दलाली हटिया आरक्षण काउंटर में हो रही है. जबकि, काउंटर से 10 कदम पर डीआरएम कार्यालय है. कॉमर्शियल विभाग के सीनियर डीसीएम उसी कार्यालय में बैठते हैं. उसके बाद भी टिकट दलाली रूकने का नाम नहीं ले रहा है. क्योंकि, जिन इसे देखने की जिम्मेदारी दी गई है, वो अनजान बनकर बैठे हैं. इसलिए, रेलकर्मियों की मिलीभगत को नजरअंदाज किया जा रहा है. ना ही कोई चेकिंग हो रही है और ना ही कोई कार्रवाई और अब ऐसे में आम यात्रियों को टिकट मिलना काफी कठिन हो गया है.

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टिकट के लिए मजदूरों का करते इस्तेमाल

हटिया स्टेशन के पास काफी मजदूर मुंबई, बेंगलुरू जाने के लिए ट्रेन का इंतजार करते हैं. दलाल उसी में से कुछ मजदूर को पैसे का लोभ देकर तत्काल टिकट के लिए लाइन में खड़ा करते हैं और इन मजदूरों के जरिए तत्काल टिकट ले रहे है. बाहर पढ़ने जाने वाले छात्रों से जब न्यूजविंग के संवाददाता ने बात कि तो पता चला कि मजदूरों को लाइन में खड़ा कर तत्काल के टिकट पहले ही कटवा लिये जाते है. और छात्रों को स्लीपर के एक टिकट के लिए एक हजार रुपए देना पड़ता है. वही टिकट के लिए इतना रुपए लेने के सवाल पर दलाल ने बताया कि मजदूर के अलावे आरक्षण काउंटर को मैनेज करना पड़ता है. पैसे ऊपर तक देना पड़ता है. इसलिए ज्यादा रुपये लेने पड़ते हैं. बड़ी बात ये है कि सीसीटीवी से काउंटर की मॉनिटरिंग भी नहीं हो रही है. केवल नाम के लिए सीसीटीवी लगाया गया है.

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विजिलेंस की पकड़ में आते हैं दलाल, कॉमर्शियल विभाग को नजर नहीं आता

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रेल विजिलेंस की छापेमारी में टिकट के ये दलाल पकड़े जाते हैं. उस पर कार्रवाई और नजर रखने के लिए विजिलेंस बराबर कॉमर्शियल विभाग को सचेत भी करता है. लेकिन कमर्शियल विभाग का कहना है कि आरक्षण काउंटर पर दलाल को टिकट नहीं मिलता है. यात्रियों को आसनी से टिकट मिल रहा है.

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अधिकारी नहीं करते निरीक्षण

अधिकारी एसी चैंबर से निकलते नहीं ही नहीं है, तो उन्हें कैसे पता चलेगा यात्रियों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे बोर्ड ने कई बार आदेश दिया है कि अधिकारी फील्ड में जाएं और यात्रियों से मिले और उनकी परेशानी को समझे, लेकिन रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण कॉमर्शियल विभाग के अधिकारी किसी से मिलते तक नहीं है. और ना ही निरीक्षण करते हैं.

शिकायत की जांच के बाद होगी कार्रवाई- सीनियर डीसीएम

रांची रेल डिवीजन के सीनियर डीसीएम अविनाश कुमार कहते है कि हमलोग आरक्षण काउंटर का नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं. अगर ऐसी कोई बात है तो इस पर निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी. दलाल पर हम लोग नजर रख रहे हैं.

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