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धनबाद हाउसिंग कालोनी में मोमबत्ती आऊट ऑफ मार्केट, ऐसा बिजली संकट नहीं देखा, इनवर्टर  भी दे गया जवाब

चारों बगल विद्युत उत्पादन केंद्र और बिन बिजली तड़प रहे धनबाद के लोग

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Dhanbad : धनबाद बिजली संकट की बिडंबना झेलता शहर है. धनबाद के 50 किलोमीटर दायरे में कम..से..कम पांच विद्युत उत्पादन केंद्र हैं पर धनबाद के नसीब में चार दिनों की चांदनी और फिर अंधेरी रात ही रही है. बिजली आपूर्ति में कुछ महीना पहले उल्लेखनीय सुधार हुआ था. तब पार्टी के सपोर्टर इसे सरकार की उपलब्धियां बताते नहीं अघा रहे थे. अब ऐसी खराब नौबत है कि भाजपा के समर्थक और जनप्रतिनिधि मुंह छुपाते घूम रहे हैं. बिजली संकट जल्द दूर होने का आश्वासन धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ मुलाकात की मीडिया में जारी तस्वीर के साथ दिया.

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डीवीसी का बकाया बड़ी समस्या

डीवीसी का झारखंड सरकार पर रघुवर दास की सरकार से पहले का 3300 करोड़ रुपया बकाया चला आ रहा है. इस बीच कोयले की भारी कमी से डीवीसी के ताप विद्युत केंद्र का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित है. ऐसी स्थिति में डीवीसी ने अपने अच्छे ग्राहक को प्राथमिकता के तौर पर बिजली देने का फैसला लिया है. उनसे बचने पर ही झारखंड में बिजली सप्लाई की जाएगी. बता दें कि झारखंड सरकार के विद्युत उत्पादन केंद्रों की उतनी क्षमता नहीं है कि राज्य की घरेलू बिजली की जरूरत को ही पूरा कर सके. ऐसी स्थिति में सरकार डीवीसी पर ही निर्भर है. झारखंड के कद्दावर मंत्री सरयू राय ने पिछले दिनों धनबाद आने पर राज्य सरकार को सलाह दी थी कि डीवीसी के बकाया का भुगतान कर दें. जाहिर है कि डीवीसी को बकाया पैसा नहीं मिला, तो वह बिजली सप्लाई में कटौती जारी रखेगा. सरकार के लोग कह रहे हैं कि दिसंबर तक बिजली की स्थिति में सुधार होगा, जब राज्य सरकार के अपने पावर प्लांट में बिजली उत्पादन में वृद्धि होगी. मालूम हो कि राज्य की जरूरत प्रतिदिन 2100 मेगावाट बिजली की है. इसकी तुलना में राज्य सरकार को अपने दो और दो निजी कंपनियों से 400 से लेकर 500 मेगावाट बिजली मिल पाती है. बाकी की खपत की पूर्ति के लिए डीवीसी पर निर्भर रहना पड़ता है.

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बढ़ती बिजली की समस्या से लोग त्रस्त

उफ…ऐसी बिजली समस्या नहीं देखी थी. जीना हराम हो गया है. धनबाद स्टेशन रोड के दुकानदार मनयीटांड़ निवासी सोमेश ने यह प्रतिक्रिया जतायी. कहा, इनवर्टर भी जवाब दे गया है. चार्ज ही नहीं हो पाता है. पूरे दिन में दो घंटा भी बिजली शायद ही रहती है. पॉश इलाका हाउसिंग कालोनी में रहनेवाले समाजसेवी अनिल कुमार पांडेय ने व्हाट्स ऐप्प मैसेज भेजा है..हाउसिंग कालोनी में मोमबत्ती आऊट आफ मार्केट. इधर, फेसबुक और सोशल मीडिया पर भी बिजली संकट को लेकर लोग लगातार आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं. बिजली संकट आए दिन कानून व्यवस्था के लिए भी समस्या बन रही है.

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