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टाटा पर है 650 करोड़ बकाया, क्या इसी राशि से सरकार बनाएगी कैंसर हॉस्पिटल: बाबूलाल

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Ranchi: रांची में बनने जा रहे कैंसर अस्पताल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने सरकार से पूछा है कि वह बतायें कि हॉस्पिटल बनने में लागत राशि किसके द्वारा (टाटा कंपनी या सरकार) खर्च की जाएगी. उन्होंने 2005 में जारी एक राज्य अध्यादेश की चर्चा करते हुए कहा कि राजधानी में आयोजित राष्ट्रीय खेल में कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर में 150 करोड़ एवं चिकित्सा बीमा योजना पर 625 करोड़ रुपये खर्च करनी थी. लेकिन, अभी तक कंपनी ने अपने मद से केवल 125 करोड़ रुपये ही खर्च किया है. यदि ऐसा है तो कहीं बकाया राशि से ही टाटा कैंसर हॉस्पिटल नहीं बनाने जा रही है.

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राज्य अध्यादेश को लेकर सरकार पर साधा निशाना

पार्टी मुख्यालय में सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 19 अगस्त 2005 को सरकार ने एक राज्य अध्यादेश जारी किया था. इसमें एक लीज नवीकरण के तहत टाटा को 30 सालों के लिए एक जमीन दी गयी थी. लीज नवीकरण में कई शर्तें थीं. पहली यह कि नवीकरण अगले 1 जनवरी 1996 से किया जाएगा. दूसरी, राजधानी में 2007 में आयोजित राष्ट्रीय खेल के लिए कंपनी 150 करोड़ रूपये कॉम्प्लेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च करेगी. जांच में पता चला है कि कंपनी ने उस राशि में से केवल 50 करोड़ कंटीजेशन फंड में दिया. जबकि, अभी भी टाटा के पास सरकार का 100 करोड़ रुपये बकाया है. इसी तरह गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले चिकित्सा बीमा योजना के लिए टिस्को को हर साल 25 करोड़ की राशि प्रीमियम देना था. इस हिसाब से 1996 से 2018 तक की राशि की गणना करें, तो यह राशि करीब 625 करोड़ बनती है. सरकार से जब इसकी जानकारी मांगी गयी, तो बताया गया कि तीन वित्तीय वर्ष (2015-16,2016-17,2017-2018) में कंपनी ने हर साल 25 करोड़ (कुल 75 करोड़) की राशि ही प्रीमियम में दी. इस हिसाब से सरकार का टाटा कंपनी के पास अभी भी करीब 550 करोड़ बकाया है. वहीं कॉम्प्लेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की राशि को शामिल करें, तो बकाया राशि करीब 650 करोड़ रुपये बनती है.

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बकाया राशि से हॉस्पिटल बनना जनता के साथ धोखा

कैंसर हॉस्पिटल को लेकर बाबूलाल ने सरकार से सख्त लहजे में पूछा कि वह बतायें कि राजधानी में प्रस्तावित कैंसर हॉस्टिपल में लागत राशि खर्च किस तरह की जानी है. क्या प्रस्तावित हॉस्पिटल को बनाने में उक्त बकाया राशि (650 करोड़) का उपयोग किया जाना है. अगर ऐसा है तो यह एक तरह से राज्य की जनता के साथ धोखा है. एक तरफ तो सरकार बताती है कि टाटा कंपनी बहुत बड़ी सेवा का काम कर रही है. दूसरी ओर अपने ही बकाया राशि से हॉस्पिटल बनाना कहां तक उचित है, यह समझ से परे है.

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