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बोल नहीं पाती, बस उसकी डबडबायी और पथरायी आंखें पूछती हैं – कब मिलेगा न्याय ?

Pravin kumar

Latehar : आंखें पथरा चुकी हैं, चेहरे पर कोई भाव नहीं, जुबां खामोश हो गई.  100 दिनों से अस्पताल में जिंदा लाश की तरह बिस्तर लेटे हुए टकटकी आंखें से निहारती, और अचेत अवस्था में पड़ी बस यही सोचती होगी कि, क्या मुझे महिला होने की सजा मिली है. क्योंकि पीड़िता के साथ सामूहिक रेप की घटना हुई है.

हालांकि पीड़िता ने हालात से लड़ने और दरिंदों से खुद को बचाने की पूरी कोशिश की. लेकिन सफल ना हो सकी. पीड़िता का सही उपचार नहीं हो पा रहा है और सरकार के द्वारा बनाई गई निर्भया फंड का लाभ भी पीड़िता को अबतक नहीं मिल सका है.

बस पथरायी आंखों से एकटक वो सबको देखती है, बोलने की कोशिश करती है पर आवाज नहीं निकलते. दो आरोपी पकड़े जा चुके हैं , लेकिन एक अब भी खुला घूम रहा है.

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 कब की है घटना

लातेहार जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर पर लूटी गांव है. 23 जनवरी के दिन गांव की महिला सुनिता (काल्पनिक नाम ) एक किलोमीटर दूर कुंदरी गांव में लगने वाले साप्ताहिक हाट से घर के लिए खरीदारी कर लौट रही थी. बुधवार का दिन था और उसी दिन हाट भी लगती थी. सुनीता अकेली थी और सामान लेकर वो जल्दी में बढ़े जा रही थी.

लेकिन तभी उसे सामने से आ रहे तीन लोगों ने रोका. सुनीता कुछ समझ पाती उससे पहले ही उन दरिंदो ने उसे घेर लिया और उसका अस्मत लूट ली. इतने से भी मन नहीं भरा तो सुनीता को तीनों ने दमभर पीटा और चेहरे पर भी वार किया.

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घटना की पीड़िता को खोजते रहे परिजन

घटना के दिन जब काफी देर तक सुनीता नहीं लौटी तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की. पीड़िता का 12 साल का बेटा अपनी मां को खोजता हुआ बाजार के रास्ते तक पहुंचा. अंधेरा होने की वजह से वह अपनी मां को आवाज भी लगा रहा था.

लेकिन एक तो अंधेरा और उपर से बारिश होने की वजह से सुनाती का कुछ पता नहीं चल पाया.  दूसरे दिन पीड़िता का बेटा एक बार फिर से अपनी मां को खोजता हुए उसी रास्ते पर निकल गया. कुछ ग्रामीण उसी रास्ते से आ रहे थे, पीड़िता के बेटे ने उनसे मां के बारे में पूछा. ग्रामीणों ने पास की झाड़ियों में एक टोकरी और उसमें कुछ घर का सामान होने की बात कही.

यह सुनकर पीड़िता का बेटा उस ओर दौड़ा और मां को जोर का आवाज देने लगा. तभी लूटी गांव से कुंदरी जाने वाली सड़क के दाहिनी ओर जवाहर उरांव के क्यारी में पीड़िता जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ी हुई थी. बच्चे ने जोर से मां कहकर आवाज लगाई. पीड़िता ने धीरे से हां कहा और बेहोश हो गयी. बच्चे ने फिर परिजनों को सूचना दी.

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जब पीड़िता का पता चला

परिजनों को पीड़िता के बारे में पता लगते ही वे सभी उस ओर दौड़ पड़े. पीड़िता बेसुध थी. फिर ग्रामीणों के सहयोग से परिजनों ने बोलेरो गाड़ी की इंतजाम किया और लातेहार सदर अस्पताल ले गये. वहां से बेहत्तर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर किया गया.

रिम्स में 3 महीने तक इलाज होने के बाद भी पीड़िता को होंश नहीं आया. वहां से भी चिकित्सकों ने जवाब दे दिया कि मरीज ले जाने को कह दिया. वहीं एक महीने से पीड़िता के बचने की आस में परिजन लातेहार के सदर अस्पताल में इलाज करा रहे हैं.

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इस घटना को लेकर अब तक क्या हुआ कार्यवाई

लातेहार सदर थाना में इस मामले पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मुकेश ठाकुर एवं एक अन्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. नामजद तीन अभियुक्तों में से फिलहाल एक आरोपी फरार है. सरकार की ओर से पीड़िता और उसके आश्रितों को किसी तरह की सरकारी सहायता अभी तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है.

वहीं इस घटना के मुख्य गवाह लूटी निवासी सुनील उरांव हैं, अबतक पुलिस ने गवाह से भी किसी तरह की कोई पूछताछ नहीं की है.

घटना की जांच के लिए स्वत्रंत जांच टीम गठित की गयी. साथ ही घटना से जुड़े कई नये तथ्यों को जांच टीम में शामिल सुनील मिंज, फिलिप कुजुर, सेलेस्टीन कुजुर और जेम्स हेरेंज ने सामने लाये.

पीड़िता के इलाज में चार लाख खर्च कर चुके हैं परिजन

पीड़िता के इलाज में अबतक काफी खर्च हो चुका है. अस्पताल ले जाने के बाद बायीं आंख और कान के बीच 6 टांके लगे हैं. पीड़िता के होंठ पर भी टांके लगे हैं. इसके अलावा अस्पताल में सही देखभाल ना होने की वजह से उसे बेडसोर हो गया है. पीड़िता का पति गुजरात में जेसीबी चलाने का काम करता था. खबर मिलते ही 24 जनवरी को ही फ्लाइट से रांची के रिम्स पहुंचा.

उसने बताया कि अब तक पीड़िता के इलाज में 3.85 लाख रूपये खर्च हो चुके हैं. इतना करने के बाद भी पीड़िता के हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है. पीड़िता के 2 बच्चे हैं. एक बेटा लूटी के सरकारी स्कूल में छठी क्लास में पढ़ता है. छोटी बेटी  भी उसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ती है.

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स्वतंत्र जांच दल की सिफारिशें

इस मामले की जांच कर रहे स्वतंत्र जांच दल ने पीड़िता के लिए कई मांगें रखीं हैं. दल का कतहना है कि

. पीड़िता का सही इलाज सरकारी खर्च पर किसी बड़े अस्पताल में सुनिश्चित कराया जाए.

. पीड़िता के आश्रितों को सरकार तत्काल निर्भया फंड, चिकित्सा अनुदान एवं मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी सहायता जैसे अन्य योजनाओं से मुआवजा राशि प्रदान करें.

. पीड़िता के दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करे.

. मुकेश ठाकुर सहित सभी आरोपियों को पुलिस तत्काल गिरफ्तार कर उन्हें सख्त से सख्त सजा की सरकार गारंटी दे.

.पीड़ित परिवार जो अभी भी भय के माहौल में जीवन बसर कर रहा है. उस माहौल को सामान्य करने हेतु प्रशासन अपनी भूमिका निभाये.

. इन सब घटनाओं के पीछे स्थानीय बाजारों में बिकने वाले शराब हैं. स्थानीय पुलिस प्रशासन स्थानीय हाट बाजारों में शराब की विक्री पर पूरी तरह से रोक लगाए.

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