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क्या हवा में फैल गया है कोरोना वायरस, WHO ने आशंका जताते हुए दिया ये जवाब

New Delhi. कोरोना वायरस को लेकर हर दिन नए दावे किए जाते हैं. जिस तरह से संक्रमण के मामले लगतार बढ़ रहे हैं. उन्हें देखकर कहा जा रहा है कि क्या वायरस हवा में है. ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं. अगर कोविड-19 मरीज पार्क में टहलकर चला गया हो तो क्या वहां जाने से हो सकती है महामारी?

सांसों की बीमारी है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) शुरू से ही कह रहा है कि कोविड-19 महामारी मरीज की सांसों से भी फैलती है. अगर आप मरीज से 6 फूट दूर हैं और मास्क पहने हैं तो मरीज के खींसने या छींकने के बाद भी आप सुरक्षित हैं. क्योंकि कोरोना वायरस आपके अंदर नहीं प्रवेश करता है.

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पिछले महीने 239 वैज्ञानिकों और इंजनियिरों ने चिट्ठी लिखकर डब्ल्यूएचओ से कोविड के एयरबॉर्न स्प्रेड की आशंका स्वीकार करने की मांग की. उसके बाद डब्ल्यूएचओ ने सहमति दे दी और कहा कि बेहद करीब में हवा के जरिए कोरोना वायरस का संक्रमण संभव है. इसका मतलब है कि आप किसी मरीज से सटे बिना या मरीज के छींकने या खांसने के बिना भी सिर्फ करीब होने के कारण संक्रमित हो सकते हैं. डब्ल्यूएचओ ने इस प्रकार से भी कोरोना के संक्रमण की आशंका जताई है.

बातचीत से फैसला है वायरस
मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने कहा कि खांसी या छींक से निकले ड्रॉपलेट्स 20 फीट तक की दूरी तय कर सकते हैं. बातचीत के दौरान भी मुंह से ड्रॉपलेट्स निकलते हैं, लेकिन बेहद महीन जो हवा में 10 मिनट या उससे ज्यादा देर तक रह सकते हैं.

वायरस भी माइक्रोस्कॉपिक ड्रॉपलेट्स में घुले हो सकते हैं. जो मरीजों के सामान्य रूप से सांस लेने और छोड़ने के दौरान निकलते हैं. इसलिए, चारों तरफ से घिरी जगह, मसलन किसी हॉल, दुकान या ऑफिस की हवा में मौजूद वायरस कई बार दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं.

रूस का दावा बना ली वैक्सीन
वहीं, रूस ने दावा किया है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन हमने बना ली है. रूस के राष्ट्रपति ब्लमिदिर पुतिन की बेटी को इसका डोज भी दिया गया है. रूस दुनिया का पहला देश है जिसने आधिकारिक तौर पर नैक्सीन बनाने का दावा किया है.

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