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सेवा में बने रह सकते हैं अपर मुख्य सचिव खंडेलवाल, वीआरएस से पहले गये छुट्टी पर

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  • खंडेलवाल के वीआरएस पर सीएम की स्वीकृति के चार माह बाद भी आदेश जारी नहीं.
  • खंडेलवाल ही हैं कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव, आदेश तभी जारी होगा जब खंडेलवाल चाहेंगे.
  • ऑल इंडिया सर्विस रूल के अनुसार, वीआरएस की अंतिम तिथि पर भी दे सकते हैं सेवा में रहने का आवेदन.
  • सेवा में बने रहने का आवेदन दिया तो झारखंड के ब्यूरोक्रेसी में ऐसा पहला मामला होगा, इससे पहले ज्योत्सना ने वीआरएस की इच्छा जताई थी.
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Ravi Aditya

Ranchi: कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल के वीआरएस लेने पर संशय की स्थिति बनी हुई है. फिलहाल खंडेलवाल छुट्टी पर चले गये हैं. वे 22 से 26 दिसंबर तक छुटटी पर हैं. उनकी जगह राज्यपाल के प्रधान सचिव सत्येंद्र सिंह को कार्मिक विभाग के सचिव का प्रभार दिया गया है. 1988 बैच के खंडेलवाल ने छह जून 2018 को वीआरएस के लिए आवेदन दिया था.

मुख्यमंत्री ने अगस्त 2018 के अंतिम सप्ताह में 31 दिसंबर 2018 की तिथि से वीआरएस की स्वीकृति दी थी. सीएम ने यह आदेश विदेश जाने से पहले दिया था. इसके पीछे वजह थी कि अगर तीन माह के अंदर वीआरएस के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जाता तो उनका वीआरएस स्वत: हो जाता.

क्यों है वीआरएस पर संशय

सीएम के आदेश के लगभग चार माह बाद भी वीआरएस का आदेश जारी नहीं हो पाया. सूत्रों के अनुसार, आदेश तभी जारी होगा जब खंडेलवाल चाहेंगे. क्योंकि खंडेलवाल कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव भी हैं. वहीं ऑल इंडिया सर्विस रूल के अनुसार, वीआरएस के एक दिन पहले भी अगर खंडेलवाल सेवा जारी रखने का आवेदन देते हैं तो उनकी सेवा बनी रहेगी. सूत्रों के अनुसार, इसका आवेदन मुख्य सचिव के जरिये सीएम को दे सकते हैं.

और चार साल की बची है सेवा

1988 बैच के आइएएस अफसर केके खंडेलवाल की सेवा अभी चार साल बची हुई है. खंडेलवाल की रिटायरमेंट की तिथि 31 जुलाई 2022 है. ब्यूरोक्रेसी में चर्चा यह भी है वे सेवा में बने रह सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो झारखड के ब्यूरोक्रेसी में यह पहला मामला होगा. इससे पहले ज्योत्सना वर्मा रे ने वीआरएस की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने वीआरएस नहीं लिया. अंतिम रूप से वीआरएस लेने वाले अफसरों में मुनीला, विमल कीर्ति सिंह, संत कुमार वर्मा, जेबी तुबिद और वीके चौहान का नाम शामिल है.

क्यों लगायें जा रहे हैं वीआरएस वापसी के कयास

ब्यूरोक्रेसी में चर्चा यह भी है कि आइआइटी की परीक्षा के लिए खंडेलवाल क्लासेस इंस्टीट्यूट खोलने के बाद से उनकी व्यस्तता बढ़ गई थी. इसके लिए उन्होंने राजधानी के विभिन्न चौक-चौराहों में होर्डिंग भी लगायी है. चर्चा यह भी कि खंडेलवाल क्लासेस के पहले बैच के लिए जरूरत के हिसाब से स्टूडेंट्स नहीं हो पा रहे हैं. इस कारण भी खंडेलवाल वीआरएस वापस ले सकते हैं. वहीं सरकार में एक बड़े ओहदे में रहकर कोचिंग क्लास चलाने पर भी सवाल खडे हो गये हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एक प्रोफेशन का नहीं होना चाहिए. खंडेलवाल फिलहाल कार्मिक सचिव हैं. वे फरवरी-मार्च में कोचिंग शुरू करेंगे.

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