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#CAAProtest : कर्नाटक, गुवाहाटी के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट भी सख्त, UP में इंटरनेट बंद करने को लेकर योगी सरकार से जवाब तलब किया

हाईकोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट जैसी सेवाएं बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही बंद की जानी चाहिए.

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Lucknow :  CAA के खिलाफ देश भर में हो रहे प्रदर्शनों को दबाने के लिए कई राज्य प्रशासन कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. इनमें सबसे ऊपर इंटरनेट और टेलीफोन सेवा को ठप करा देना है. साथ ही कहीं धारा 144 लगा दी जा रही है तो कहीं लाठीचार्ज किया जा रहा है. कर्नाटक, गुवाहाटी के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इंटरनेट सेवा बंद करने को लेकर अपने तेवर तल्ख किये हैं.

यूपी के कई शहरों में Internet Services बाधित किये जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने  यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट ने सरकार से अगले कार्य दिवस पर हलफनामे के जरिये अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.  हालांकि हाईकोर्ट  ने प्रभावित जगहों पर इंटरनेट सेवाएं तुरंत  बहाल किये जाने का कोई आदेश नहीं दिया है.

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CAA को लेकर यूपी में  हिंसा जारी

जान लें कि  नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर यूपी में  हिंसा जारी है. इसी के मद्देनजर यूपी सरकार ने कई शहरों में इंटरनेट सेवा पर रोक दी है. मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस गोविंद माथुर के कोर्ट ने इस मामले में तल्ख टिप्पणी की है. इस क्रम में कहा कि इंटरनेट आम लोगों की जिंदगी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. इंटरनेट बंद होने से न सिर्फ जरूरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं, बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ है. हाईकोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट जैसी सेवाएं बेहद विपरीत परिस्थितियों में ही बंद की जानी चाहिए.

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  चीफ जस्टिस कोर्ट में हुई सुनवाई

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नागरिकता कानून को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया. दिल्ली और अलीगढ़ में भारी हिंसा होने की खबर मिली है.

चीफ जस्टिस के कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय, सीनियर एडवोकेट रवि किरण जैन सहित अन्य  वकीलों ने  इंटरनेट सेवाएं बंद होने की जानकारी दी.  कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा है.

इंटरनेट बंद किये जाने को लेकर एडिशनल एडवोकेट जनरल एके गोयल ने कोर्ट में कहा कि कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा होने की वजह से ऐसा निर्णय लेना पड़ा.  अदालत ने  यूपी सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है. इस मामले में तीन जनवरी को सुनवाई होगी.

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कर्नाटक व गुवाहाटी हाइकोर्ट ने सवाल उठाये

जान लें कि इससे पूर्व कर्नाटक हाइकोर्ट ने कर्नाटक सरकार द्वारा बेंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों में धारा 144 लगाने के फैसले पर सवाल उठाया था. कर्नाटक हाइकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह 19 से 21 दिसंबर तक लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों की वैधता की जांच करेगा. इधर गुवाहाटी हाइकोर्ट ने असम सरकार को कहा है वह मोबाइल इंटरनेट सेवाएं गुरुवार को बहाल करे.

जस्टिस मनोजित भुइयां और जस्टिस सौमित्र सैकिया की खंडपीठ ने पत्रकार अजित कुमार भुइयां और वकीलों बोनोश्री गोगोई, रणदीप शर्मा और देबकांता डोलेय की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को यह निर्देश दिया.

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