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अयोध्या में भगवान राम की कृपा से प्रति सेकंड साढ़े पांच लाख रुपये बढ़ गये जमीन के दाम!

जानिए श्री राम जन्मभूमि से जुड़ा क्या है नया विवाद?

Uday Chandra Singh

Ayodhya : अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विवादों के घेरे में है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मिलीभगत से दो करोड़ रुपये कीमत वाली जमीन 18 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप है.

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आम आदमी पार्टी के महासचिव संजय सिंह ने यह आरोप लगाते हुए सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय से मामले की जांच कराने की मांग की है. हालांकि चंपत राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो इस तरह के आरोपों से घबरानेवाले नहीं हैं.

आम आदमी पार्टी के महासचिव और सांसद संजय सिंह ने कुछ दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि कोई यह कल्पना भी कैसे कर कर सकता कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के नाम पर कोई घोटाला और भ्रष्टाचार करने की हिम्मत करेगा.

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम पर चंपत राय ने करोड़ों रुपये चंपत कर दिये. संजय सिंह का दावा है कि अयोध्या सदर तहसील के बाग बिजैसी गांव में पांच करोड़ 80 लाख रुपये की मालियत वाली गाटा संख्या 243, 244 और 246 की जमीन सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी नामक व्यक्तियों ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से 18 मार्च को दो करोड़ रुपये में खरीदी थी.

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आप सांसद ने कहा कि शाम सात बज कर 10 मिनट पर हुई इस जमीन खरीद में राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह बने थे.

साथ ही आरोप लगाया कि उसके ठीक पांच मिनट के बाद इसी जमीन को चंपत राय ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से साढ़े 18 करोड़ रुपये में खरीदा, जिसमें से 17 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिये एडवांस के तौर पर दिये गये.

संजय सिंह ने दलील देते हुए कहा कि- देखा जाये तो प्रति सेकंड साढ़े पांच लाख रुपये जमीन के दाम बढ़ गये. हिंदुस्तान तो क्या, दुनिया में कहीं किसी जमीन का दाम इतनी तेजी से नहीं बढ़ता.

मजे की बात यह है कि जो राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय बैनामा कराने में गवाह थे, वो ही इस जमीन को ट्रस्ट के नाम पर खरीदने में भी गवाह बन गये. यह साफ तौर पर धन शोधन और भारी भ्रष्टाचार का मामला है.

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मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से मांग करता हूं कि तत्काल ईडी और सीबीआई के जरिए इस मामले की गहन जांच करा कर इसमें शामिल भ्रष्टाचारी लोगों को जेल में डाला जाये क्योंकि यह इस मुल्क के करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ-साथ उन करोड़ों लोगों के भरोसे का भी सवाल है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा राम मंदिर निर्माण के लिए दिया है.

इसमें एग्रीमेंट के स्टांप का समय और बैनामे के स्टांप का समय भी सवाल खड़ा करता है. जो जमीन बाद में ट्रस्ट को बेची गयी उसका स्टांप शाम को पांच बज कर 11 मिनट पर खरीदा गया और जो जमीन पहले रवि मोहन तिवारी और अंसारी ने खरीदी उसका स्टांप पांच बज कर 22 मिनट पर खरीदा गया.

बहरहाल, राम जन्मभूमि के नाम पर जमीन खरीद में कथित घोटाले का यह मामला सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है और यूपी में आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी असर डाल सकता है.

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