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जागरूकता फैला कर ही माहवारी संबधित गलत धारणाओं को दूर किया जा सकता है: आराधना पटनायक

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36 प्रतिशत महिलाओं को ही माहवारी से संबधित सही जानकारी, 74 प्रतिशत महिलाएं सेनेटरी नैपकिन तक इस्तेमाल नहीं करती

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इस्तेमाल के साथ इसके निष्पादन की भी सही जानकारी हो

Ranchi: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे और यूनिसेफ की सर्वे के अनुसार, देश में मात्र 36 प्रतिशत महिलाएं माहवारी के दौरान सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती है.

जबकि 74 प्रतिशत महिलाओं को इसके बारे में जानकारी भी नहीं है. जो हैरान करने वाले आंकड़े हैं. ऐसे में तो देश में आधुनिकता को अपनाया जा चुका है लेकिन फिर भी जब बात माहवारी की होती है तो लोग खुल कर बात नहीं करते.

ये बातें पेयजल स्वच्छता विभाग मंत्रालय भारत सरकार के सह सचिव समीन कुमार ने कही. वे झारखंड पेयजल जल स्वच्छता विभाग की ओर से आयोजित मेन्सट्रुएल हाइजीन मैनेजमेंट विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

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इस दौरान उन्हेांने कहा कि लोग सेनेटरी नैपकिन के इस्तेमाल की बात तो करतें है, लेकिन इसके डिकंपोजिंग के बारे में भी लोगों को सोचना चाहिए.

क्योंकि एक सेनेटरी नैपकिन को नष्ट होने में चार सौ से पांच सौ वर्ष लगते है. इस दौरान ‘चुप्पी तोड़ो-स्वस्थ रहो’ कार्यक्रम अभियान का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का आयोजन बीएनआर चाणक्य में किया गया.

प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन गलत अवधारणाएं जुड़ी है

पेयजल स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने इस दौरान कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. लेकिन गलत अवधारणाओं से जुड़े होने के कारण किशोरियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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राज्य में जो महिलाएं या किशोरियां सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल नहीं करती. उन्हें इसके उपयोग और इसके निष्पादन की जानकारी देने की कोशिश की जाएगी. जागरूकता के माध्यम से ही इन अवधारणाओं को दूर किया जा सकता.

ऐसे में पुरूषों और लड़कों की सहभागिता भी जरूरी है, क्योंकि वे भी समाज के अंग है. इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि भारत में 64 फीसदी महिलाएं सेनिटरी नैपकिन की जगह-अलग अलग चीजें इस्तेमाल करती है. वहीं 28 फीसदी महिलाएं इसे बाहर फेंक देतीं है.

28 फीसदी महिलाएं कूड़ेदान में फेंकती है. 33 फीसदी नैपकिन को सुरक्षा के साथ जलाया जाता है, तो वहीं 15 फीसदी नैपकिन खुले में जला दिये जाते हैं.

‘चुप्पी तोड़ो-स्वस्थ रहो’ अभियान का शुभारंभ

इस दौरान चुप्पी तोड़ो-स्वस्थ रहो अभियान का शुभारंभ किया गया. साथ ही इससे संबधित पोस्टर रिलीज किया गया. इसके बारे में बताते हुए आराधना पटनायक ने कहा कि अभियान का नाम इसलिए ये रखा गया है, ताकि किशोरियां अपनी चुप्पी तोड़ कर खुलकर इस विषय पर बात करें.

अभियान 28 मई से 27 जून 2019 तक चलेगा. इस अभियान के तहत विभिन स्तर पर माहवारी संबंधित जागरूकता अभियान का संचालन किया जाएगा. जो चार सप्ताह में होगा.

पहले सप्ताह में प्रशिक्षण, दूसरे सप्ताह जागरूकता कार्यक्रम, तीसरे सप्ताह ग्राम, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर एक्शन प्लान तैयार करना और चौथा सप्ताह कार्ययोजना में कार्रवाई करने का सप्ताह होगा.

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उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत किशोरियों, किशोर दीदी एवं भईया का समूह बनाया जायेगा एवं उन्हें प्रशिक्षित कर के जागरूकता अभियान में सम्मिलित किया जायेगा.

किशोरियों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम के दौरान किशोरियों ने अपने अनुभव साझा किये. लोहरदगा से आयी राज्यकीयकृत कस्तूरबा विद्यालय की छात्रा सुशांती कुमारी ने बताया कि मैन्सट्रुएल हाइजिम मैजमेंट कार्यक्रम के तहत उसके स्कूल में काफी सुधार आया है.

पहले जहां लड़कियां इस विषय में खुलकर बात नहीं करती थी, वहीं अब लड़कियां इस बारे में खुल कर बातें करती है. सुशांति ने बताया कि माहवारी के दौरान होने वाली परेशानियों से निबटने के लिए उसे उसकी मां ओझा के पास ले जाया करती थी.

लेकिन स्कूली शिक्षकों के सहयोग से उसे और उसके परिवार को इस संबध में जानकारी मिली. वहीं अन्य छात्रा जेबा परवीन ने बताया कि उसके स्कूल में पैड बैंक बनाया गया है.

जिसे लड़कियां इस्तेमाल में लाती है. इससे लड़कियों की परेशानी खत्म हो गई. वहीं इस दौरान अनंगड़ा के मंगेश झा ने इसके सही निष्पादन के बारे में लोगों को जानकारी दी.

जिससे पर्यावरण प्रदूषण न हो. मौके पर यूनिसेफ की राज्य प्रमुख मधुलिका जोनाथन, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के निदेशक अबू इमरान समेत अन्य लोग उपस्थिति थे.

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