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फोन में, पास की दुकान में मौजूद सबसे बड़ी चीनी कंपनी को जानिये, नोटबंदी के बाद जिसके पोस्टरबॉय बने थे मोदी

Girish Malviya

चाइनीज एप्स तो डिलीट हो जाएंगे, लेकिन एक बार भारत की सबसे बड़ी चीनी कम्पनी के बारे में तो जान लीजिए! और वह है आपके फोन में मौजूद, आपकी दुकान में मौजूद PAYTM.

चीनी कंपनी अलीबाबा की होल्डिंग वाली पेटीएम देश की सबसे बड़ी ई पेमेंट कंपनी है. कुछ भोले भाले लोग पेटीएम का मालिक विजय शेखर शर्मा को समझते हैं. क्योंकि वही इस कंपनी के मुख्य प्रबंधक निदेशक भी हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके पास कंपनी की कितनी हिस्सेदारी है? उनके पास कंपनी की मात्र 15.7 फीसदी हिस्सेदारी ही है.

पेटीएम की मुख्य कंपनी का नाम है- One 97 कम्युनिकेशन लिमिटेड. यह सिंगापुर की कंपनी है. अब यही से सारा कंफ्यूजन शुरू होता है. क्योंकि अलीबाबा ने भी अपना निवेश चीन की अपनी मूल कंपनी के जरिए नहीं किया है. बल्कि उसने पेटीएम में निवेश अपनी एक सहयोगी कंपनी, जो सिंगापुर में रजिस्टर्ड है, उसके जरिए किया है. पेटीएम में निवेश करने वाली कंपनी का नाम है- ‘अलीबाबा सिंगापुर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’

अलीबाबा ने 2015 में पेटीएम में 41 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी. दरअसल, तभी अलीबाबा के जैक मा भारत आये थे और मोदी जी से भी मिले थे.

पेटीएम का असली उभार नोटबंदी के बाद से ही शुरू हुआ था, पेटीएम, जो चीन के अलीबाबा की फंडिंग हासिल कर चुकी थी, मोदी जी नोटबंदी के दूसरे दिन उसके पोस्टरबॉय बने हुए थे.

दरअसल, पेटीएम के मॉडल को अलीबाबा कंपनी के पेमेंट गेटवे अली-पे की ही तरह ही डेवलप किया गया था. वर्ष 2018 में पेटीएम ई-कॉमर्स में अलीबाबा सिंगापुर की हिस्सेदारी कम होकर 36.31% हो गयी. मायासोशि सोन की सॉफ्टबैंक ने भी अपनी हिस्सेदारी प्रत्यक्ष तौर पर कंपनी में 20 प्रतिशत कर ली थी. लेकिन चीन में भी दोनों कंपनियों की एक दूसरे में हिस्सेदारी है. इसलिए यह मामला उलझा हुआ है.

पेटीएम के बाकी के शेयर एसएपी वेंचर्स, सिलिकॉन वैली बैंक, पेटीएम की मैनेजमेंट टीम और अन्य इनवेस्टर्स के पास हैं. एसएआईएफ पार्टनर्स इंडिया की हिस्सेदारी 4.66% है. वर्ष 2017 में अनिल अंबानी के पास जो एक प्रतिशत शेयर पेटीएम का था, उसे भी अलीबाबा ने खरीद लिया था. एक बड़ा हिस्सा अलीबाबा की ऐंट फाइनेंशियल के पास भी है. यानी अगर स्पष्ट रूप से देखा जाए तो वर्ष 2020 में भी चीनी अलीबाबा ग्रुप और उसकी सहयोगी ऐंट फाइनेंशियल के पास वन-97 कम्युनिकेशंस के सबसे ज्यादा शेयर हैं. केवल दिखावे के लिए एक भारतीय को कम्पनी का मुख्य चेहरा बना रखा है.

अलीबाबा की टीम ही पेटीएम के ऑपरेशन के रिस्क कंट्रोल कैपेसिटी को डेवलप करती है. जानकार बताते हैं कि रिस्क कंट्रोल कैपेसिटी ही किसी भी ऑनलाइन कंपनी की बैक बोन यानी रीढ़ की हड्डी होती है.

PayTm कोई छोटी मोटी कंपनी नहीं है. पिछले दिनों विजय शेखर शर्मा का एक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ. इसमें उन्होंने दावा किया था कि देश के ऑनलाइन भुगतान में अब भी पेटीएम की हिस्सेदारी 70 से 80 फीसदी हो गयी है.

रेलवे की टिकट बेचने की जिम्मेदारी के लिए सिर्फ पेटीएम के पेमेंट गेटवे को ही अधिकृत किया है. रेलवे के टिकट बिक्री में रोज करोड़ों नहीं अरबों का ट्रांजेक्शन होता है. इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चीनी होल्डिंग वाली PAYTM को क्यों दी गयी. सवाल तो खड़ा होता ही है?

कैसे चीनी कंपनियों से जुड़ी PAYTM देश की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनी बन गयी. सवाल तो खड़ा होता है.

और सवाल तो ये भी खड़ा होता है कि यह सब जानते बुझते हुए आज सरकार PAYTM पर कैसे और  किस प्रकार की कार्यवाही करेगी?

डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं. 

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