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एकनाथ शिंदे को सीएम बनाकर भाजपा एक तीर से साध रही है चार निशाने

Mumbai: महाराष्ट्र में दस दिनों से अधिक चले सियासी ड्रामे का अब अंत माना जा रहा है. उद्धव से बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद देकर भाजपा ने एक तीर से दो नहीं चार निशाने साधे हैं. यदि सब कुछ ठीक-ठाक चला तो भाजपा को भविष्य में एक नहीं कई फायदे होंगे. बीती शाम शिंदे को सीएम पद देने की घोषणा के साथ ही भाजपा ने लोगों ने हैरानी में डाल दिया, इसके बाद जब देवेंद्र फडणवीस के उपमुख्यमंत्री होने की घोषणा हुई तो लोगों को हैरानी और बढ़ी. इसके साथ ही राजनीतिक विश्लेषण इस फैसले के विश्लेषण में जुटे गए. नतीजा यह निकला कि भाजपा भविष्य को ध्यान में रखते हुए फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की कुर्बानी देने के लिए तैयार किया है.

 

भाजपा ने पहला फायदा यह उठाया कि उद्धव ठाकरे व शिवसेना की राज्य में अकड़ व पकड़ दोनों ढीली कर दी. शिवसेना व भाजपा दोनों हिंदूत्व की राजनीति करती है. दोनों दलों के साथ रहने के बाद महाराष्ट्र शिवसेना जब तक भाजपा की राह रोड़े अटकाते रही है, शिवसेना को कमजोर करने के साथ ही भाजपा के रास्ते यह रोड़ा खत्म हो गया. अब शिंदे शिवसेना में बाल ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ाएंगे. वह भाजपा के लिए भी वफादार रहेंगे, क्योंकि उन्हें आगे राजनीतिक और कानूनी जंग में भाजपा का समर्थन चाहिए.

 

भाजपा शिंदे को आगे कर एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहनमुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) पर कब्जा की जुगत में है. 37 वर्षों से बीएमसी शिवसेना के कब्जे में है. राज्य में भाजपा की भी सरकार रही तो बीएमसी पर शिवसेना का ही जोर रहा. तीन माह बाद बीएमसी चुनाव है. भाजपा इस कोशिश है कि शिवसेना को पूरी तरह से कमजोर कर बीएमसी पर कब्जा जमाया जाए. शिवसेना की मजबूती का बड़ा कारण बीएमसी को माना जाता है.

 

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शिंदे मराठा हैं. महाराष्ट्र में करीब तीस फीसदी मतदाता इसी समुदाय से हैं. शिवसेना की राजनीति की शुरुआत मराठा राजनीति से ही हुई थी, बाल ठाकरे मराठी मानुष की वजह से देश में फैले थे. भाजपा राष्ट्रीय राजनीति के आलोक में समुदाय विशेष की राजनीति से गुरेज करती है. ताकि देश भर में किरकिरी से बच सके. ऐसे में शिंदे को आगे कर भाजपा तीस फीसदी वोट बैंक को अपने खाते में करना चाहती है.

 

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उद्धव ठाकरे भाजपा पर सरकार गिराने व शिंदे पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगा सकते हैं. शिंदे के सीएम बनने के साथ ही भाजपा ने उद्धव से दोनों मुद्दे छीन लिए. इसके साथ ही यह भी उम्मीद की जा सकती है कि राज्य भर के शिव सैनिक अब भाजपा के साथ जुड़ेंगे.

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