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महंगाई भत्ता और मजदूरी दर में वृद्धि से व्यापारी परेशान, श्रमायुक्त से मिले चेंबर प्रतिनिधि

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  • बढ़ी हुई दर पर भुगतान के लिए बाध्य करना गलत, राहत की मांग की गयी
  • केंद्र कृषि मंत्रालय के किसान विधेयक वेबिनार में शामिल होंगे चेंबर प्रतिनिधि

Ranchi: चेंबर सदस्यों ने सोमवार को श्रमायुक्त रामनिवास यादव से मुलाकात की. इस दौरान न्यूनतम मजदूरी दर में हुए बढ़ोतरी और इससे होने वाली परेशानी पर चर्चा की गयी. चेंबर ने यह प्रमुखता से कहा कि कोविड-19 के कारण देश में उत्पन्न आर्थिक संकट की चुनौतिया हैं. ऐसे समय में विभाग की ओर  से निजी उपक्रमों को महंगाई भत्ता सहित दैनिक एवं मासिक न्यूनतम मजदूरी की दरों से भुगतान करने के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है.

चैंबर अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा कि अप्रैल से अगस्त 2020 तक प्रदेश में लगभग पांच माह तक व्यवसायिक गतिविधियां शिथिल होते हुए भी स्टेकहोल्डर्स ने अपने कर्मचारियों का वेतन, पीएफ एवं ईएसआइ का भुगतान कर दिया है. ऐसे में महंगाई भत्ता सहित दैनिक एवं मासिक न्यूनतम मजदूरी की दरों में बढोत्तरी उचित नहीं है.

यह भी कहा गया कि सरकार की अनुमति से व्यापारिक व औद्योगिक गतिविधियां आरंभ अवश्य हुई हैं, लेकिन स्थिति सामान्य होने में अभी और समय लगेगा. व्यापारी यह प्रयास कर रहे हैं कि वे ऐसे समय में अपने प्रतिष्ठान में कर्मचारियों की छंटनी नहीं करें.

श्रमायुक्त रामनिवास यादव ने फेडरेशन की बातों को सुनते हुए यह आश्वस्त किया कि वे इस मामले में विभागीय मंत्री से वार्ता करेंगे. प्रतिनिधिमण्डल में चैंबर अध्यक्ष कुणाल अजमानी, महासचिव धीरज तनेजा, कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे.

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कृषि विधेयक के वेबिनार मे शामिल होंगे चेंबर प्रतिनिधि

मंगलवार को कृषि विधेयक पर वेबिनार आयोजित किया गया हैं. वेबिनार केंद्र सरकार के विपणन और निरीक्षण निदेशालय और कृषि मंत्रालय की ओर से आयोजित किया गया है जिसमें झारखंड चेंबर के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

शाम 4 से 5 बजे तक आयोजन होगा. चेंबर की ओर से अपने सभी प्रमण्डलों के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष तथा इस क्षेत्र में कार्यरत व्यापारियों व किसानों से इस बैठक में सम्मिलित होने का आग्रह किया गया है.

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चेंबर अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा कि अध्यादेश के आंशिक अध्ययन के बाद ऐसा महसूस किया गया कि कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश 2020 किसानों को अपने उत्पाद कहीं भी बेचने की आजादी देता है. यह अध्यादेश कृषि उपज की ऑनलाइन खरीद-बिक्री को भी मान्यता देता है.

राज्य सरकारों को किसानों, व्यापारियों और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार प्लेटफॉर्मों से किसी तरह की लेवी, मंडी शुल्क या उपकर लेने से भी रोकता है. इसके जरिए किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, कृषि उपज मंडी समितियों का एकाधिकार समाप्त होगा और व्यापारियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढावा मिलेगा.

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