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फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर रांची के बाद अब गिरिडीह चेंबर ने लगायी गुहारः व्यापारियों की मार्मिक पुकार-अब तो सुध लो सरकार

गिरिडीह चेंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा, अदूरदर्शी नीतियों वाली है राज्य की यह सरकार

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  • रांची के बाद गिरिडीह के कारोबारियों ने उद्योगों की गिरती हालत के लिए रघुवर सरकार को ठहराया जिम्मेवार

Giridih:  फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, रांची के हमले के बाद व्यापारी संगठन गिरिडीह चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी सूबे के रघुवर दास पर हमला बोल दिया है. शनिवार को प्रेसवार्ता कर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल झुनझूनवाला, अशोक जैन और राजेन्द्र बगेड़िया ने कहा कि साल 2014 में गठित रघुवर सरकार ने जनहित और उद्योग के मुद्दों पर कारोबारी संगठन से कोई सुझाव नहीं लिया.

लिहाजा, राज्य में हर उद्योगों की दशा दिनोंदिन बिगड़ रही है. साढ़े चार साल के कार्यकाल में नीति साफ नहीं होने और उद्योगों के खराब हाल ने राज्य की स्थिति को बिगाड़ दिया है.

कारोबारियों में राज्य के रघुवर सरकार को लेकर नाराजगी तो है ही, साथ ही इन मुद्दों पर विपक्षी दलों के निशाने पर भी है. यह पहला मौका है जब चार सालों के कार्यकाल में कारोबारी संगठन ने राज्य सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाया है.

उत्पाद नीति, बढ़ी हुई बिजली दर पर कारोबारियों ने अपना भड़ास निकाला. कुछ बड़े अधिकारियों पर रघुवर सरकार को गुमराह कर सरकार चलाने में सहयोग का आरोप लगाया.

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माइका कारोबार की उपेक्षा का आरोप लगाया

उद्योगों के बिगड़ते हालात से जुड़े सवालों की शुरुआत गिरिडीह व कोडरमा के माइका कारोबार से हुई. जिसमें चेंबर के पदाधिकारियों ने कहा कि माइका को मेजर मिनरल से हटाकर माइनर मिनरल में करने के बाद भी रघुवर सरकार खनन को लेकर गंभीर नहीं रही. सवालिया लहजे में चेंबर के पदाधिकारियों ने कहा कि माइका खनन को लेकर सरकार की नीति साफ रहती तो गिरिडीह में रोजगार भी बढ़ता और बड़े पैमाने पर सरकार को राजस्व भी हासिल होता.

क्योंकि इसी माइका कारोबार ने गिरिडीह में अप्रत्यक्ष रूप से करीब एक लाख लोगों को रोजगार दिया है. जिस वक्त माइका कारोबार फलफूल रहा था, उस वक्त गिरिडीह व कोडरमा में माइका के सौ से अधिक खदान थे. जबकि 20 से अधिक निर्यातक माइका ट्रेड से जुड़े थे. खनन नीति नहीं बनने के कारण ही गिरिडीह व कोडरमा के क्वार्ट्ज व पत्थरों का खनन नहीं हो पा रहा है.

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अन्य स्थानों के स्टील उद्योग की भी हालत है खराब

गिरिडीह समेत राज्य के अन्य स्थानों के स्टील उद्योग के खराब हालत पर भी रघुवर सरकार को घेरा गया. कहा कि जिस प्रकार 24 घंटे सात दिन आपूर्ति होनी चाहिए, वह नहीं हो रही है. जिसके कारण गिरिडीह के स्टील उद्योगों के हाल खराब हो रहे हैं.

कारोबारी संगठन के पदाधिकारियों ने सूबे के किसानों के हाल व पानी समस्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि रघुवर सरकार किसानों को इजरायल भेज रही है. लेकिन खेती के लिए पानी नहीं है. इसकी चिंता रघुवर सरकार नहीं कर रही है. फिर उन्नत खेती के लिए इजरायल भेजे, या कहीं और- क्या फायदा. प्रेसवार्ता में चेंबर के ध्रुव सोंथालिया, विकास खेतान, राजेश छापरिया, प्रवीण बगेड़िया समेत कई मौजूद थे.

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