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व्यवसायियों की मांग : लॉकडाउन की इस मुश्किल की घड़ी में मदद करे सरकार

  • व्यापारियों ने कहा अगर और लॉकडाउन बढ़ी और स्थिति यही रही तो बढ़ जायेगी बेरोजगारी
  • 40 दिनों के लॉकडाउन में अब तक बिजली के फिक्सड चार्जेस में नहीं दी गयी रियायत 

Ranchi : लॉकडाउन में केंद्र सरकार ने निर्देश दिया कि किसी भी सेक्टर में कर्मचारियों के वेतन में कटौती नहीं की जायेगी. हालांकि कुछ सेक्टरों में कुछ प्रतिशत कटौती करते हुए कर्मचारियों को वेतन दिया गया. लेकिन अधिक मुसीबत माइक्रो इंडस्ट्रीज के लिए है. जो पिछले डेढ़ महीने से बंद है.

इस दौरान इन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन भी देना है. पिछले डेढ़ महीने से उद्योग बंद होने के कारण उत्पादन पूरी तरह से प्रभावित है. वहीं बाजार भी बंद है. जिससे मुनाफा इन उद्योगों को हो नहीं रहा. कच्चा माल से बने उत्पादों की बिक्री भी नहीं हो रही. राज्य में रजिस्टर्ड छोटे उद्योगों की संख्या लगभग 12000 है और छोटे उद्योगों की लागत लगभग 25 लाख होती है.

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ऐसे में इन उद्योगों के सामने केंद्र सरकार के निर्देश से भविष्य में संकट उत्पन्न होगी. राज्य के कुछ व्यापारियों ने बात करते हुए बताया की वे सरकार के फैसले का पालन कर रहे हैं. लेकिन बदले में केंद्र और राज्य सरकार भी उद्योगों के अस्तित्व को बचाने के लिए प्लान बनायें. राज्य के 20 प्रतिशत उद्योग ही अब तक शुरू हैं. जिसमें सिर्फ दस प्रतिशत ही काम हो रहा है.

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राजनीति से उपर उठकर बेरोजगारी के बारे में सरकार

पूर्व चेंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने कहा कि यह बहुत की क्रिटिकल  कंडीशन है. उद्योगों में उत्पादन बंद है. सरकार ने पहले तय कर दिया वेतन देना है. बाजार भी बंद है, जिससे व्यापारियों को लाभ तो है नहीं. मार्च का वेतन दे दिया गया है. जिसमें दिक्कत भी नहीं हुई.

अब अप्रैल का वेतन भी दे दिया जायेगा. लेकिन और दो सप्ताह के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है. राज्य सरकार ने उद्योग खोलने तो दिया, लेकिन उत्पादन और मजदूर की परेशानी है.

इससे आगे कहा कि भले ही व्यापारी अभी वेतन दे दें. लेकिन लॉकडाउन बढ़ने स्थिति और बिगड़ेगी. दीपक ने कहा कि राज्य सरकार न ही बिजली के फिक्सड चार्जेस में कमी कर रही है और न ही कोई सहायता दे रही है.

जबकि ये वक्त राजनीति से ऊपर उठकर रोजगार के लिए सोचने का है. क्योंकि लॉकडाउन के बाद सबसे अधिक संकट बेरोजगारी की होगी. जिसमें अहम भूमिका छोटे और मध्यम उद्योगों की हेाती है.

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छोटे उद्योग तो जीने मरने की स्थिति में

जेसिया अध्यक्ष फिलिप मैथ्यू ने कहा कि छोटे उद्योग, जो रजिस्टर्ड हैं उनकी संख्या लगभग 12 हजार है. अन्य तो 25 हजार तक होंगे. ऐसे में सरकार के इस फैसले से उद्योगों के सामने जीने मरने की स्थिति है.

सरकार भले कुछ कटौती करके देने का निर्देश देती. लेकिन ऐसा भी नहीं है. व्यापारी वर्ग भी समझते हैं कि कर्मचारी उनपर ही निर्भर है. ऐसे में कोई भी अपने कर्मचारियों का वेतन कटौती तो नहीं करेगा.

भले ही सरकार निर्देश नहीं देती तो भी. लेकिन फिलहाल स्थिति बदतर हैं. इन्होंने कहा कि भले ही अभी वेतन समेत अन्य चीजें छोटे उद्योग कर ले रहे हैं. लेकिन सब कुछ सामान्य होने पर इसका खामियाजा भुगतना होगा. इतनी सर्तकता के साथ छात्रों और मजदूरों को लाया जा रहा है. ऐेसे में उद्योगों को अब रियायत दी जानी चाहिए.

कम से कम सॉफ्ट लोन ही दे दे सरकार

चेंबर सदस्य अजय भंडारी ने कहा कि सरकार के सभी आदेश का पालन करते हैं. कर्मचारियों को कोई भी व्यापारी कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि भविष्य में भी सहयोगी होंगे. लेकिन सरकार कम से कम व्यापारियों के लिए सोचे.

छोटे उद्योगों की स्थिति भी रोज कमाने खाने वाली है. लोन, वर्किंग एक्सपेंस समेत कई खर्च होते हैं. जिससे एक उद्योग चलता है. ऐसे में कम से कम सरकार तीन साल के लिए सॉफ्ट लोन ही व्यापारियों को दे दे. जिसे तीन साल में भरना हो. नहीं तो आने वाले समय में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या होगी.

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