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झामुमो के बयान पर व्यापारिक संगठनों ने जताई आपत्ति, औद्योगिक वातावरण खराब ना करने की अपील

Ranchi : झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्य में स्थित केंद्रीय पीएसयू के बारे में बयान दिया. बयान में रोजगार और स्थानीय लोगों की टेंडर में भागीदारी का मामला उठाया गया. साथ ही कहा गया कि टाटा की तरह ही सेल, रेल और अन्य पीएसयू को घेरा जायेगा. सत्ताधारी पार्टी की ओर से ऐसे बयान आने से राज्य के व्यापारिक संगठनों में अंसतुष्टि देखी जा रही है. आंशका जतायी जा रही है कि इससे राज्य में औद्योगिक संगठनों पर असर पड़ेगा.

झारखंड स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और झारखंड चैंबर ने इस पर चिंता व्यक्त की है. इन संगठनों का कहना है कि राज्य के लघु और मध्यम उद्योग टाटा जैसी कंपनियों पर निर्भर है.

क्योंकि इन कंपनियों से छोटे उद्योगों को रोजगार मिलता है. ऐसे में सत्ताधारी दल की ओर से विरोध जताना या ऐसे बयान से राज्य के उद्योगों के समक्ष परेशानी बढ़ेगी.

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दस हजार कंपनियां टाटा पर हैं निर्भर

जेसिया अध्यक्ष फिलिप मैथ्यू ने कहा कि सरकार को शांतिपूर्ण बात करनी चाहिए. दबाव नहीं बनाना चाहिये. झामुमो सत्ताधारी पार्टी है. ऐसे बयान से राज्य की छवि खराब होती है. साथ ही औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं.

सिर्फ जमशेदपुर में दस हजार छोटे उद्योग टाटा पर निर्भर है. जिन्हें टाटा से ऑर्डर मिलते हैं. ऐसे में सरकार को शांतिपूर्ण मामलों को निपटाना चाहिये. उग्र आंदोलन या दबाव नहीं बनाते हुए औद्योगिक वातावरण प्रभावित नहीं किया जायें.

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टाटा समूह के लिये उचित बयान नहीं

चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा ने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मामला है. इस तरह के बयान टाटा समूह के लिये उचित नहीं है. रेलवे के बाद राज्य में सबसे अधिक रोजगार टाटा में है. ऐसे में इस तरह का बयान गलत है.

ओपन मीडिया में ऐसे मामले आने से पहले सरकार को उच्च स्तर पर मामले को निबटाना चाहिये. बाहर से निवेशकों को सरकार बुला रही. राज्य में उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा.

ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के ऐसे बयान से परेशानी बढ़ सकती है. रोजगार और स्थानीय को लेकर मामले हो सकते है पर इन्हें संजीदगी से मामले को निपटाना चाहिये.

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राज्य की छवि खराब कर रहा बयान

चैंबर के सह सचिव विकास विजयवर्गीय ने कहा कि इस तरह का बयान व्यापार के ईको सिस्टम को खराब कर रहा है. राज्य में झामुमो और कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी है. इन बयानों से राज्य के उद्योगों को नुकसान झेलना पड़ेगा. राज्य की अधिकांश छोटे उद्योग बड़ी कंपनियों पर निर्भर है. पिछले कुछ वर्षों में राज्य में उद्योग बंद हुए.

सरकार उद्योगों को बढ़ावा दे रही है. लेकिन ऐसे कदम से राज्य की छवि खराब हो रही है. निवेशकों को राज्य में निवेश करने में परेशानी होगी.

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मुद्दे हो सकते है पर व्यवस्था न बिगड़े

पूर्व चैंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने कहा कि ऐसे मामलों को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिये. जेएमएम सत्ताधारी पार्टी है. रोजगार या अन्य मामले हो सकते है. लेकिन इन मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिये. संजिदगी के साथ बयान देना चाहिए. राज्य में छोटे उद्योगों के सामने इससे विकट स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

ये बयान दिया था झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने

झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जैसा आंदोलन टाटा कंपनी के खिलाफ हो रहा है. ऐसे ही आंदोलन रेल, सेल और कोल कंपनियों के खिलाफ किया जायेगा. अब अधिकार की लड़ाई होगी.

टाटा जैसी कंपनी से इसकी शुरुआत हो चुकी है. मांगे बताते हुए उन्होंने कहा कि 75 फीसदी रोजगार और टेंडर में एक करोड़ तक का काम मूलवासियों को मिले. आंदोलन को आगे बढ़ाया जायेगा.

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