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संकट में झारखंड का बस ट्रांसपोर्ट, खड़ी हो गयी हैं 800 से अधिक बसें

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Subhash Shekhar

Ranchi : आनेवाले दिनों में झारखंड में रोड ट्रांसपोर्ट की बड़ी समस्‍या खड़ी हो सकती है. यात्री बसों की फिटनेस से जुड़े मापदंडों की वजह से राज्‍य की 500 से अधिक पुरानी बसें खड़ी कर दी गयी हैं. वहीं, झारखंड के परिवहन विभाग ने करीब 300 नयी बसों को भी फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है. इनमें सामान्‍य यात्री बस और स्‍लीपर यात्री बसें, दोनों शामिल हैं. आनेवाले कुछ महीनों में सैकड़ों बसों की फिटनेस की अवधि खत्‍म हो जायेगी. इन सभी बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्यूअल नहीं हुआ, तो झारखंड की सभी बसें सड़क पर खड़ी हो जायेंगी और ऐसे में सूबे में रोड ट्रांसपोर्ट की विकराल समस्‍या पैदा हो सकती है.

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झारखंड की कोई भी कंपनी मापदंड के अनुरूप नहीं बना सकती बस

झारखंड की राजधानी रांची के एक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर किशोर मंत्री ने बताया सरकार द्वारा सामान्‍य और स्‍लीपर, दोनों तरह की बसों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा रहा है. फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं होने की वजह से हमारी सैकड़ों बसें खड़ी कर दी गयी हैं. उन्होंने बताया कि फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जो मापदंड बताये जा रहे हैं, उस अनुरूप झारखंड में कहीं कोई कंपनी बस तैयार करके देने में सक्षम नहीं है. ऐसे में झारखंड में वैसी बसें तैयार कर चला पाना मुमकिन नहीं है. जमशेदपुर में सूरज और बेबको कंपनियां बस के लिए बॉडी तैयार करती हैं.

संकट में झारखंड का बस ट्रांसपोर्ट, खड़ी हो गयी हैं 800 से अधिक बसें

अधिसूचना जारी होने के बाद बढ़ गयी परेशानी

किशोर मंत्री ने बताया कि स्‍पीलपर बसों के संचालन के लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से पहले कोई खास गाइडलाइन नहीं बनी थी. इन बसों के लिए आपसी अंडरस्‍टैंडिंग से ही एमवीआई फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता था. इधर 5, जुलाई 2018 को झारखंड सरकार का बस ट्रांसपोर्ट के लिए नयी गैजेट अधिसूचना आयी है. इसके बाद परेशानी बढ़ गयी है.

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यूनियन और संगठन का प्रतिवेदन विभाग को देना चाहिए : परिवहन आयुक्त

झारखंड सरकार के परिवहन आयुक्‍त फैज अहमद मुमताज ने कहा, “नयी गाइडलाइन के अनुसार बस ट्रांसपोर्ट के फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर समस्‍याएं आ रही हैं. इसकी चर्चा बस ट्रांसपोर्ट से जुडे संगठनों ने भी की है. इससे जुड़े यूनियन और संगठन का प्रतिवेदन और प्रेजेंटेशन विभाग को देना चाहिए. उसे हम केंद्रीय परिवहन विभाग को भेज देंगे. वहां से जैसा सुझाव आयेगा, हम आगे की कार्रवाई करेंगे.”

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बस ट्रांसपोर्ट के लिए नयी गाइडलाइन में क्‍या है खास मापदंड

झारखंड सरकार ने 2 जुलाई 2018 को राज्‍य के सभी जिलों के डीटीओ और एमवीआई को आदेश दिया कि 13 अप्रैल 2018 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना गजट संख्‍या 240 का पालन सुनिश्चित करें. केंद्र सरकार के नये गजट के अनुसार बस की बॉडी निर्माण से जुड़ी सभी तरह की जानकारी vahan.nic.in/makermodel साइट पर अपलोड करनी है. इसमें अपलोड करने के बाद केंद्र सरकार द्वारा एजेंसी बस की बॉडी डिजाइन और नियमों के पालन को प्रूव करते हुए निर्मित बस की बॉडी को स्‍व-अभिप्रामिण किया जा सकेगा. मूल नियम 22 के तहत बस का ढांचा, चेचिस का विवरण, चेचिस निर्माता का विवरण, चेचिस का प्रकार, इंजन मेक और मॉडल, इंजन की स्थिति, इंधन का प्रकार, इंजन नंबर, व्‍हील बेस, चेचिस का भार, लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई, फ्रंट ओवरहेड, रियर ओवरहेड, सर्विस, दरवाजों की संख्‍या, प्रकार, खिड़कियों के प्रकार व संख्‍या, खिड़कियों की स्थिति, गार्ड रेलिंग, आपातकालीन निकास की स्थिति जैसी कई जानकारियां देना अनिवार्य है.

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परिवहन विभाग झारखंड सरकार द्वारा स्‍लीपर बसों के लिए तय गाइडलाइन

5 जुलाई 2018 को झारखंड सरकार के परिवहन आयुक्‍त ने सभी जिलों के डीटीओ और एमवीआई को निर्देश दिया कि केंद्रीय मोटरगाड़ी नियमावली 1989 की अधिसूचना जीएसआर 905 (ई) के अनुसार तय गाइडलाइन का अनुपालन अनिवार्य है. तय नियम के तहत बस की बॉडी का निर्माण Bus Body Codes-AIS-119 (Rev:1) के अनुसार किया गया हो. केंद्रीय मोटरयान नियममावली, 1989 के नियम 126 के तहत भारत सरकार की एजेंसी से स्‍लीपर बस की बॉडी के Prototype को स्‍वीकृत व प्रमाणित किया गया हो.

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