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बस परिवहन निगम के कर्मियों को मिलेगा पंचम वेतनमान का बकाया, संकल्प जारी

140 करोड़ का वित्तीय भार

Ranchi : बिहार राज्य पथ एवं परिवहन निगम के तहत झारखंड में काम कर रहे 791 कर्मियों को बकाया राशि का भुगतान किया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कर्मियों को 1.7.2004 की तिथि से बकाया राशि मिलेगी. परिवहन विभाग ने इस आशय का संकल्प जारी कर दिया है. बकाया भुगतान पूरे सात साल का किया जायेगा. 140 करोड़ रुपये इसके तहत स्वीकृत किये गये हैं. वर्तमान में सारे कर्मी विभिन्न विभागों में विभिन्न पदों में सामायोजित हैं.

सभी कर्मी ग्रुप सी व ग्रुप डी से हैं. परिवहन कर्मियों को वेतन पुनरीक्षण के बाद बकाया भुगतान समायोजित कार्यालय द्वारा दिया जायेगा.

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वैसे निगम कर्मी जो सरकार की सेवा में समायोजित हो गये परंतु अपनी सेवानिवृत्ति, मृत्यु की तिथि तक पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं कर सके, उनको देय राशि का भुगतान संबंधित प्रभारी जिला परिवहन पदाधिकारी के द्वारा किया जायेगा, जहां पर वह निगम कर्मी कार्यरत हैं. ऐसे कर्मी जो पोस्टिंग के बाद संबंधित जगह योगदान नहीं किये उनका भुगतान विभाग करेगा.

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बता दें कि बिहार राज्य परिवहन निगम के बंद कर देने के बाद करीब 1200 कर्मियों में 791 कार्यरत कर्मियों को विभिन्न सरकारी कार्यालयों में 24.8.2011 की तिथि से समायोजित किया गया है.

इस वक्त इन निगम कर्मियों को चौथा वेतनमान मिल रहा था, लेकिन जब इनका समायोजन दूसरे विभाग में हुआ तो वे वहां सीधे छठा वेतनमान पाये. ऐसे में निगम कर्मियों ने पांचवा वेतनमान का लाभ देने के लिए हाइकोर्ट में याचिका दायर की.

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उनका कहना था कि समायोजन के क्रम में पांचवे वेतनमान के पूरा लाभ से वंचित कर दिया गया है, जिससे उन्हें ग्रॉस वेतन में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. पूरे मामले में राज्य सरकार ने भी अपना पक्ष रखा, कोर्ट में यह वाद लंबा खिंच गया. हालांकि, 2016 में ही हाइकोर्ट ने इन्हें पांचवें वेतन का बकाया भुगतान देने का आदेश दिया था.

इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गयी. वहां से भी 2021 में आदेश पारित हुआ और झारखंड सरकार को कर्मियों के बकाया भुगतान करने को कहा.

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ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में परिवहन विभाग झारखंड जल्द ही विभिन्न सेवा के कर्मियों के बकाया भुगतान की कार्रवाई शुरू करेगा.

बकाया भुगतान 1.7.2004 से 24.8.2011 तक साल की अवधि तक किया जायेगा. परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार एक-एक कर्मचारी को आठ से दस लाख रुपये तक की राशि बकाये के रूप में भुगतान की जायेगी. बता दें कि राज्य में अभी सिर्फ 135 कर्मचारी ही नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं.

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