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जहां किसानों की संख्या कम, वहां एमएसपी पर धान की बंपर खरीदारी

Ranchi: न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान बिक्री में किसान दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, लेकिन जिन जिलों में किसानों की संख्या कम है वहां धान की बंपर खरीदारी की जा रही है.

अभी तक 26 प्रतिशत किसानों ने ही सरकार को धान बेचा है, जबकि सरकार के पास करीब दो लाख किसानों ने निबंधन कराया है. इस बीच धान की खरीदारी का ग्राफ भले ही इस माह कुछ बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, लेकिन किसानों की संख्या देख यह बढ़ता हुआ ग्राफ कहीं ना कहीं बिचौलियों की तरफ इशारा कर रहा है, जो किसानों का हक मार रहे हैं.

पलामू जिले के कुल 13 हजार किसानों में सिर्फ दो हजार किसानों ने डेढ़ लाख क्विंटल धान एमएसपी पर सरकार को बेचा है, जबकि हजारीबाग जिले को देखा जाए तो यहां से 12 हजार किसानों ने करीब सात लाख क्विंटल धान की बिक्री की है.

किसानों की संख्या कम होने के बाद भी कई जिलों से लाखों क्विंटल धान की बिक्री पर विभाग का तर्क है कि धान गीला रहने के कारण किसानों ने देर से धान बेचना शुरू किया है. धान खरीदारी से पहले किसानों की जांच कर ही धान खरीदारी की जाती है. इसके लिए अलग से मॉनीटरिंग भी जिला स्तर से की जाती रही है.

खाद्य-आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव के अनुसार धान की पैदावार इस बार अच्छी हुई है. सरकार किसानों को एमएसपी पर धान खरीद तुरंत आधे पैसे उनके खाते में दे रही है. सरकार ने 45 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा है जिसे पूरा कर लिया जाएगा.

हालांकि जिन जिलों में कम किसानों की संख्या है और वहां अधिक धान खरीदारी हो रही है, इस पर उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं कहा, लेकिन किसानों का निबंधन कराने के बाद ही सारी चीजें तय होने की बात कही.

मालूम हो कि एमएसपी पर धान खरीदने के पीछे सरकार की मंशा सिर्फ बिचौलियों पर नकेल कसना है. जबकि आज भी करीब 28 लाख किसानों में से सिर्फ 1.96 लाख किसानों ने ही अपना निबंधन कराया है.

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किसानों की बिक्री के साथ ही मिल रहा आधा पैसा

धान बिक्री के बाद अधिकतर किसानों को तीन दिनों के अंदर पैसा उनके खाते में भेजा जा रहा है. कई किसानों को अभी भी पैसा लेने का इंतजार है.

हालांकि बताया जा रहा है कि कुछ किसानों के खाते की समस्या आ रही है तो किसी में तकनीकी समस्या है. बाकी बचा हुआ पैसा मार्च के बाद किसानों को दिए जाने का प्रावधान है.

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