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बुलंदशहरः गोकशी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की सच्चाई आयी सामने

सात में से छह नाम निकले फर्जी

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Bulandshahar:  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कथित गोकशी की सच्चाई अब सामने आने लगी है. इस मामले की एनडीटीवी की ओर से की गई पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. गोकशी के आरोप में जिन सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें छह नाम फर्जी निकले हैं. बता दें कि कथित रूप से गोवंश के अवशेष मिलने के बाद एक गांव में हिंसा फैल गई थी. ये हिंसा इतनी उग्र और तीव्र थी कि गुस्साये लोगों की भीड़ ने एक पुलिस इंस्पेक्टर सहित दो लोगों को जान से मार दिया. हिंसा के बाद दो एफआईआर दर्ज की गई है. योगेश राज नाम के व्यक्ति ने पहली एफआईआर दर्ज करायी है, जो गोकशी के खिलाफ है. दूसरी एफआईआर पुलिस ने दर्ज करायी है. पुलिस की एफआईआर में हिंसा और पुलिस इंस्पेक्टर की मौत का मामला दर्ज किया गया है. इस एफआईआर में गोकशी के खिलाफ एफआईआर कराने वाले योगेश राज को ही मुख्य आरोपी बनाया है. योगेश राज हिंसा के बाद से फरार है. बताया जा रहा है कि वो बजरंग दल का नेता है.

एफआईआर की कॉपी

सात में से दो नाम हैं बच्चों के

इस पड़ताल में और भी चौंकाने वाली बात सामने आयी है. पड़ताल में लगी टीम को पता चला है कि मामले में दर्ज सात नामों में से छह नाम बोगस हैं। टीम ने पड़ताल के दरम्यान ये जानने की कोशिश की कि मामले में दर्ज सभी लोग नयाबांस गांव के हैं या नहीं. सबसे पहले ये बात सामने आई कि सात लोगों में से दो तो नाबालिग बच्चे हैं. बाकी पांच लोगों के बारे में पता करने के लिए टीम ने नयाबांस गांव और आसपास के गांवों का दौरा किया.

एक नामजद 10 साल से गांव में रहते ही नहीं

मामले में दर्ज एक व्यक्ति जिसका नाम शराफत है, उसके बारे में पता चला है कि वो 10 साल से फरीदाबाद में  रह रहे हैं. उसका गांव आनाजाना बंद है. बाकी बचे तीन लोगों में से सुदैफ,  इलियास और परवेज भी नयाबांस गांव के रहने वाले नहीं हैं. पूछने पर गांव वालों ने बताया कि उन्होंने इनका नाम पहले कभी नहीं सुना है. एफआईआर में दर्ज आखिरी नाम सर्फुद्दीन का है. इस पड़ताल से ये बात साफ हो गई है कि एफआईआर में दर्ज सात नामों में से छह नाम फर्जी हैं. अब सवाल ये उठ रहा है कि योगेश राज ने जानबूझकर इनका नाम क्यों एफआईआर में लिखवाया है.

कुछ लोग शांति नहीं, हिंसा पसंद करते हैं

एफआईआर में जिन दो बच्चों के नाम हैं, टीम ने उनके घरवालों से बात की. इनमें से एक के पिता का कहना है कि दोनों बच्चे छोटे हैं. उनकी उम्र 11-12 साल है. गोकशी क्या होती है, उनको ये भी मालूम नहीं है. बच्चों के पिता ने ये भी बताया कि जिस दिन हिंस भड़की, उस दिन दोनों बच्चे बुलंदशहर में थे. फिर भी पुलिस ने बच्चों को घंटों थाने में बुलाकर पूछताछ की. इन बच्चो के नाम को जानबूझकर एफआईआर में डाले गए हैं. कुछ लोग हैं जो शांति नहीं हिंसा पसंद करते हैं. इसी सोच के तहत ये एफआईआर दर्ज करायी गयी है.

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