न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बजट सत्र : झारखंड अनुसूचित जनजाति आयोग की होगी स्थापना, दो अन्य विधेयकों को मिली स्वीकृति

43

Ranchi : बुधवार को सदन की दूसरी पाली में तीन विधेयकों को स्वीकृति दी गयी. साथ ही, ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिश्यू रूल को भारत के संविधान के अनुच्छेद 252 के अंतर्गत संशोधन को संकल्प के माध्यम से अंगीकृत किया गया. झारखंड अनुसूचित जनजाति के लिए राज्य आयोग विधेयक को स्वीकृति दी गयी. इस विधेयक पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 70 साल के बाद अनुसूचित जनजाति समाज की आर्थिक और सामाजिक उन्नति के लिए इस विधेयक को लाया गया है. विभागीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति बहुल राज्य है हमारा, अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए इस विधेयक को लाया गया है. इस आयोग का गठन होने से अधिकार की सुरक्षा करने का काम आयोग के माध्यम से होगा. विधेयक के अनुसार आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य वही हो सकते हैं, जो जन्म से मृत्यु तक पारंपरिक, सांस्कृतिक रूप से आदिवासी रीति-रिवाज, शादी-विवाह, परंपरा का पालन करता हो. इस विधेयक के आने के बाद विधायक सुखदेव सिंह ने टीएसी और आयोग के हितों में टकराव होने की संभावना की बात कही, पर बताया गया कि दोनों की लिमिटेशन तय है, टकराव की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी.

राज्य आवास बोर्ड अब 10 करोड़ तक की बना सकता है योजना, पहले दो करोड़ ही थी लिमिट

विधानसभा में बुधवार को झारखंड राज्य आवास बोर्ड संशोधन विधेयक को भी स्वीकृति दी गयी. इस संशोधन विधेयक के बाद अब राज्य आवास बोर्ड 10 करोड़ रुपये तक की योजना बना सकता है. इसके बाद उसे नगर विकास से अनुमति लेनी पड़ेगी. इसके पहले दो करोड़ रुपये तक का प्रावधान था. इस विधेयक को बिहार राज्य आवास बोर्ड के तहत राज्य में अंगीकृत किया गया था. इस विधेयक को 1982 में ही लाया गया था, उसी वक्त से दो करोड़ रुपये तक का प्रावधान था, अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है. दो करोड़ रुपये से अधिक की योजना होने पर नगर विकास विभाग में फाइलों की प्रक्रिया बहुत लंबी थी. इस वजह से इस विधेयक को लाया गया है.

hosp3

माडा के पैसे अब राज्य सरकार के खाते में आयेंगे, सरकार वेतन और विकास पर करेगी खर्च

सदन में बुधवार को तीसरा विधेयक झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार संशोधन विधेयक 2019 को भी स्वीकृति दी गयी. इस विधेयक के तहत माडा में आनेवाले कर्मचारियों के वेतन और विकास के कामों को अब सीधा राज्य सरकार करेगी. इससे पहले माडा को प्रतिशत में पैसे दिये जाते थे और टैक्स राज्य सरकार लेती थी, अब पैसे सीधे राज्य सरकार के खाते में आयेंगे. कर्मचारियों और माडा के तहत आनेवाले विकास के कार्यों के विकास के मद पर राज्य सरकार ही जरूरत के हिसाब से खर्च करेगी. इससे पहले माडा के कर्मचारियों को 40 महीनों से सैलरी नहीं मिली थी, ऐसी समस्या उत्पन्न न हो इसके लिए ही यह नयी व्यवस्था की गयी है.

इसे भी पढ़ें- मैनुअल के हिसाब से नहीं बनते पुल-पुलिया और डायवर्सन, मेरी बात गलत साबित करे सरकार, तो विधायकी से दे…

इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर में बनेंगे इको फ्रेंडली 2480 किफायती आवास, जुडको को मिला जिम्मा

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: