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BUDGET 2022 : वित्त मंत्री ने बजट को बताया काल्पनिक साहित्य, कृषि मंत्री ने पूछा-कैसे होगी आमदनी

Ranchi : केंद्रीय बजट 2022 पर झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और कृषि मंत्री बादल ने निराशा जतायी है. रामेश्वर के मुताबिक बजट काल्पनिक साहित्य जैसा है. पहले दो करोड़ नौकरियों की बात थी, अब 60 लाख की बात की गयी है. हकीकत है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण 2020 में 6.4 करोड़ लोग अत्यंत गरीबी में धकेल दिये गये. बहुत हो हल्ला था कि कोरोना के बाद ऐसा बजट होगा जिससे देश का काया कल्प हो जायेगा. पर अब आम लोग और गरीब होंगे. महंगाई से त्रस्त जनता को राहत कैसे मिले, किसानों की आय दोगुनी कैसे होगी, सरकार ने कोई दिलचस्पी इसमें नहीं दिखाई है. सच्चाई यह है कि सालाना प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में गिरावट आयी है.

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गरीबी से बाहर निकालने का विजन नहीं

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रामेश्वर उरांव के मुताबिक वर्ष 2020-21 में प्रति व्यक्ति आय 17589 से गिरकर 16975 रुपये हो गया है. मृत काल 2022-23 में जहां 80 करोड़ लोग सरकारी मुफ्त अनाज पर आश्रित हैं, उनको गरीबी से उठाने का कोई स्पष्ट विजन नहीं दिख रहा.

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आर्थिक सर्वे के अनुसार सरकार की आय में जबरदस्त उछाल देखा गया. 2020 की तुलना में 64.9 प्रतिशत राजस्व में बढ़ोत्तरी हुई, जबकि ऑक्सफैम रिपोर्ट के अनुसार 2021 के दौरान भारत में 84 प्रतिशत परिवारों की आय घट गयी.

रोबस्ट टैक्स संग्रहण काल के बावजूद आयकर दाता को कोई राहत नहीं दी गयी है. एनपीएस में वर्तमान में सरकारी कर्मचारी को अपने बेसिक वेतन प्लस डीए पर 10 प्रतिशत राशि जमा करने की सीमा को 14 प्रतिशत तक जमा करने की मामूली राहत है. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिस प्रीमियम स्टैंडर्ड डिडक्शन में कटौती सीमा, होम लोन में प्रिंसिपल पेमेंट और ब्याज भुगतान पर राहत की बड़ी उम्मीद थी परंतु सबको निराशा हुई है.

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बुनियादी जरूरतों की बजाय हीरे की चिंता

बादल पत्रलेख के अनुसार बजट में कहा गया है कि हीरे के गहने सस्ते होंगे. इससे सरकार का विजन स्पष्ट होता है. बजट सिर्फ आय-व्यय का ब्योरा है. आमदनी कहां से होगी, यह नहीं बताया गया है. जून 2022 में राज्यों को दिये जाने वाले जीएसटी क्षतिपूर्ति के मियाद पूरे होने को है. सभी राज्यों ने इसे अगले 5 वर्ष तक बढ़ाने का अनुरोध वित्तमंत्री सीतारमण से कहा था. इससे संबंधित पत्र डा.रामेश्वर उराँव ने लिखा भी था पर ऐसा नहीं करके झारखण्ड जैसे प्रदेश के साथ नाइंसाफी हुई है. जब -जब यूपी में चुनाव होते हैं, भाजपा को गंगा याद आती है.

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