JharkhandMain SliderRanchi

करोड़ों के मुआवजे पर दलालों की नजर, पहले भी खाते से निकाले जा चुके हैं 1.2 करोड़

Pravin Kumar/ Kumar Gaurav

Ranchi : रांची के कांके प्रखंड में सरकार ट्रिपल आईटी खोलने जा रही है. इसको लेकर रैयतों से 14.40 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है. इसके लिए कुल 19 अवार्डी चिह्नित हैं. इनमें से सात रैयत, जिनकी जमीन कम थी, उन्हें मुआवजे का पूरा भुगतान कर दिया गया है, पर अधिक जमीन वाले रैयतों पर दलालों की पैनी नजर है. सांगा गांव के रैयत सोमरा मुंडा, छेदी मुंडा और केसा मुंडा, तीनों भाइयों को करीब एक करोड़ 20 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान किया जा चुका था. इसके लिए रैयतों के गांव सांगा से करीब 30 किमी दूर नामकुम अंचल के बरगांवा के आईडीबीआई में अलग से खाता खुलवाया गया. लेकिन, दलालों ने मिलकर मुआवजे की इस राशि को फर्जी तरीके से निकाल लिया है. तीनों रैयतों को पता तक नहीं कि उन्हें कितनी राशि का भुगतान किया गया है. मामले में भू-अर्जन से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें- आयुष्‍मान भारत योजना का गोल्‍डन कार्ड नहीं बनने से सदर हॉस्पिटल में हंगामा

मुआवजा भुगतान में आदिवासियों का हो रहा शोषण : पूर्व मुखिया

पंचायत के पूर्व मुखिया लक्ष्मण मुंडा ने भू-अर्जन कार्यालय में आवेदन देकर मुआवजे के भुगतान पर फिलहाल रोक लगाने की अपील की है. अपने आवेदन में उन्होंने कहा है कि रैयत सोमरा मुंडा, छेदी मुंडा और केसा मुंडा को इस सप्ताह लगभग सात करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है, जिसे रांची के प्रभावशाली भू-माफिया, दलाल और भू-अर्जन कार्यालय रांची के लोग बैंक से आरटीजीएस और एनईएफटी के जरीये पैसे निकाल लेंगे. मिलीभगत से दलालों ने तीनों के नाम से इलाहाबाद बैंक में खोले गये खाते में अपना नाम जुड़वा लिया है, पर रैयतों को इसकी कोई जानकारी नहीं है. इन्हीं लोगों के पास इन तीनों रैयतों के पासबुक, चेकबुक और अन्य कागजात हैं. पूर्व मुखिया ने आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, उपायुक्त, अपर समाहर्ता और सदर अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजा है.

इसे भी पढ़ें- पहाड़ी मंदिर : दो दिनों की गिनती में 7,26,100 रुपये प्राप्त, 12 दानपेटियों को खोलना अभी भी बाकी

किस जमीन का मिलना था मुआवजा

मुआवजा कांके प्रखंड के सांगा गांव में ट्रिपल आईटी के लिए अर्जित की गयी भूमि के एवज में खाता संख्या 149 खेसरा संख्या 1397, 1399, 1401, 1402, 1404 एवं खाता संख्या 14 खेसरा संख्या 1398, 1403, 1413, 1414 एवं खाता संख्या 220 खेसरा संख्या 1442 के लिए सोमरा मुंडा, छेदिया मुंडा, काशी मुंडा को मुअवजा मिलना है.

इसे भी पढ़ें- मानव तस्‍करी मामले में प्रभा व दीपशिखा को आदिवासी समाज से बहिष्‍कार का ऐलान

मुआवजा का एक रुपया भी नहीं मिला मुझे : रैयत सोमरा मुंडा

रैयत सोमरा मुंडा ने कहा, “जमीन के मुआवजे के रूप में अभी तक मुझे एक रुपया भी नहीं मिला है. मेरे पास मेरे नाम से ही खाता है. तीनों भाइयों के नाम से अलग-अलग खाता खुलवाया है.” जबकि, भू-अर्जन कार्यालय के मुताबिक सोमरा मुंडा को 60 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है.

मेरी तीन एकड़ 35 डिसमिल जमीन गयी, नहीं मिला मुआवजा : रैयत केसा मुंडा

वहीं, रैयत केसा मुंडा ने कहा, “ट्रिपल आईटी के लिए अधिग्रहित की गयी मेरी जमीन का मुआवजा मुझे एक बार भी नहीं मिला है. मेरी अकेले की तीन एकड़ 35 डिसमिल जमीन गयी है.” वहीं, भू-अर्जन कार्यालय के मुताबिक, इन्हें अब तक 30 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है.

मुआवजे की कितनी राशि मिलनी है, यह हमें पता नहीं : बालेश्वर मुंडा

रैयत छेदी मुंडा सुनने में असमर्थ हैं, इसलिए उनके पुत्र बालेश्वर मुंडा ने इस मुद्दे पर बात की. बालेश्वर मुंडा ने कहा, “मेरे पिताजी को पहले 78 लाख रुपये मिले हैं. वर्तमान में हमें कोई मुआवजा नहीं मिला है. कांके रोड के इलाहाबाद बैंक में 15 दिन पहले खाता खुलवाया है. भू-अर्जन कार्यालय के कहने के बाद हमने खाता खुलवाकर डिटेल कार्यालय में जमा करा दिया है. आईडीबीआई में हमारा खाता है. पहले आईडीबीआई बैंक में मुआवजे का भुगतान किया गया था. वहीं, मुआवजे की राशि कितनी आनी है, यह हमें पता नहीं है.”

इसे भी पढ़ें- लोकमंथन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति, अध्यक्ष मुख्यमंत्री, राज्यपाल अतिथि तक नहीं

ट्रिपल आईटी के लिए अधिग्रहण में जिनकी जमीन गयी, उन्हें उसका सही रूप से मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. मुआवजे की राशि निकालने में दलाल, बिचौलिया के साथ-साथ भू-अर्जन कार्यालय की संलिप्तता के संकेत  निम्नलिखित चार बातों से मिलते हैं-

  1. उपरोक्त तीनों रैयतों को एक करोड़ 20 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान हाल ही में किया गया है. उनके पैसे की निकासी कैसे हुई और कब हुई, यह खाताधारियों को पता नहीं है.
  2. क्या वजह रही कि सांगा गांव के रैयतों का बैंक अकाउंट 25 से 30 किमी दूर जाकर एक प्राइवेट बैंक में खुलवाया गया, जबकि जिनके नाम से मुआवजे का भुगतान हुआ, वे तीनों निरक्षर हैं.
  3. आखिर किसके कहने से पैसा आने के 15 दिन पूर्व ही कांके रोड के इलाहाबाद बैंक में खाता खुलावाया गया, जिसमें करीब सात करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है?
  4. मुआवजे की राशि कितनी और कब आनी है, यह सूचना भू-अर्जन कार्यालय से दलालों तक कैसे पहुंच जा रही है, और उन्हें यह बता कौन रहा है?

रैयतों को मिलनेवाले मुआवजे में धोखाधड़ी की शिकायत कार्यालय को मिली है. हम रैयतों को पूरी तरह से ठोक-बजाकर मुआवजा का भुगतान करेंगे.

-सीमा सिंह, भू-अर्जन पदाधिकारी, रांची

Advt

Related Articles

Back to top button