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धान क्रय केंद्र से झारखंड के किसानों का भरोसा टूटा, 1.39 लाख किसान रजिस्टर्ड थे, 86402 नहीं पहुंचे धान बेचने

ये किसान धान क्रय केंद्रों में रजिस्ट्रेशन तो कराते है लेकिन धान बिचैलियों को ही बेचते है.

Ranchi : राज्य के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी से वंचित हो जाते है. न ही राज्य के किसान रजिस्ट्रेशन में रूचि लेते है और न ही एमएसपी का लाभ लेते हैं. हर साल इनका रजिस्ट्रेशन खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से किया जाता है. रजिस्टर्ड किसान होने के बाद भी सरकार इन्हें एमएसपी का लाभ नहीं दे पाती है. क्योंकि किसान धान क्रय केंद्र तक पहुंचते ही नहीं.

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52 हजार 530 किसानों ने ही धान क्रय केंद्र में धान बेचा

ये किसान धान क्रय केंद्रों में रजिस्ट्रेशन तो कराते है लेकिन धान बिचैलियों को ही बेचते है. जबकि हर साल राज्य सरकार की ओर से इन किसानों के लिए अलग से बोनस की घोषणा भी की जाती है. साल 2019-20 के आंकड़ों की मानें तो एक लाख 38 हजार 932 किसानों ने धान क्रय केंद्र में रजिस्टेªशन कराया. इसमें से 52 हजार 530 किसानों ने ही धान क्रय केंद्र में धान बेचा. ऐसे में 86 हजार 402 किसानों ने क्रय केंद्र में धान नहीं बेचा. इनमें से 2400 किसानों को अब तक एमएसपी का लाभ नहीं मिला है.

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साल 2016-17 में मात्र 39 हजार किसान पहुंचे क्रय केंद्र: खाद्य आपूर्ति विभाग के आंकड़ों की मानें तो साल 2018-19 में एक लाख 21 हजार 204 किसान रजिस्र्टड हुए. इनमें से 34 लाख 247 किसानों ने धान क्रय में उपज बेचा. साल 2017-18 में एक लाख 14 हजार 276 किसान रजिस्र्टड हुए. इनमें से 34 हजार 615 धान क्रय केंद्र पहुंचे.

साल 2016-17 में 93 हजार 537 किसानों ने धान क्रय केंद्र में धान बेचा. इसमें से 39 हजार 475 किसानों धान क्रय में उपज बेचा. बता दें किसानों को एमएसपी केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है. जबकि बोनस राज्य सरकार की ओर से दी जाती है.

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साल 2018-19 में पूर्व सरकार ने 150 रूपये बोनस दिया था. वहीं साल 2019-20 में ये बोनस 185 रूपये रहा. ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से 1815 और 185 मिलाकर कुल दो हजार रूपये प्रति क्लिवंटल एमएसपी तय की गयी. इसके बाद भी किसानों की संख्या धान क्रय केंद्रों में कम रही.

क्या है एमएसपी

एमएसपी या यूनतम समर्थन मूल्य उपज बेचने के बदले किसानों को दिया जाता है. यह मूल्य केंद्र और राज्य सरकार की ओर से तय की जाती है. जिसमें राज्य सरकार की ओर से किसानों को बोनस दिया जाता है. झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुरजीत सिन्हा ने बताया कि राज्य के किसानों को एमएसपी की दरें काफी देर से मिलती है. धान क्रय केंद्र में धान बेचने के बाद भी तीन महीने बाद भुगतान किया जाता है. जबकि किसानों को मौसम के अनुसार फसल लगाने के लिए पैसे चाहिए होते है. ऐसे मे किसान क्रय केंद्र में नहीं जाते.

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