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स्तन कैंसर नहीं है लाइलाज, सावधानी बरतने से हो सकता है बचाव

स्तन कैंसर होने के कई कारण हो सकते है. साहनी की माने तो स्तन कैंसर लाइलाज नहीं है लेकिन इसके लिए इसका सही समय पर पता लगना बेहद जरूरी होता है.

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NW Desk : इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, दिल्ली के सीनियर कंस्लटेंट सर्जिकल ओंकोलॉजी, डॉक्टर सिद्धार्थ साहनी के अनुसार स्तन कैंसर का कोई एक खास कारण नहीं है. यह फेफड़े के कैंसर की तरह नहीं होता है, जो सिगरेट या तम्बाकू बंद कर देने से रुक सकता है. स्तन कैंसर होने के कई कारण हो सकते है. साहनी की माने तो स्तन कैंसर लाइलाज नहीं है लेकिन इसके लिए इसका सही समय पर पता लगना बेहद जरूरी होता है.

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महिलाओं को महीने में एक बार करानी चाहिए स्तन जांच

साहनी ने बातचीत के दौरान कहा कि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता लगाकर जड़ से खत्म करने पर जोर दिया जा सकता है. इसके लिए इसका पता लगाना बेहद जरूरी है. इसके लिए शुरुआती जागरुकता बहुत जरूरी है. इसके लिए हर महिला को स्वयं ही अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए. किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति समझ में आने से इसकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. महिलाओं को कस से कम महीने में एक बार स्तन की जांच जरुर करनी चाहिए. यह नियमित तौर पर होना आवश्यक है. इसके लिए खुद को यह समझाना होगा कि यह सामान्य है.

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40 साल पार महिला कराएं मैमोग्राफी

डॉक्टर साहनी के मुताबिक 40 साल पार महिलाओं को साल में एक बार मैमोग्राफी करानी चाहिए. साहनी के मुताबिक जांच से इस बीमारी का उस समय पता चलता है, जब आपको किसी भी समस्या का अहसास नहीं हो रहा होता है. अगर महिला किसी भी प्रकार की गांठ को नजरअंदाज करती है तो वह कैंसर का रूप ले सकता है. यह जांच थोड़ी महंगी है. लेकिन इस से बचने के लिए जागरुकता और स्वयं जांच बहुत जरूरी है. स्वयं जांच से इस बीमारी का बिना किसी मेडिकल जांच के पता लगाने में मदद मिलती है. साथ ही समय रहते इसका इलाज कराया जा सकता है. मैमोग्राफी के दौरान किसी को रेडियशन से कोई खतरा नहीं होता.

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जांच के दौरान असामान्य स्थिति को गम्भीरता से लें

डॉक्टर साहनी ने कहा कि एक महिला अपने स्तन को अच्छी तरह समझती है. अगर स्वयं जांच के दौरान किसी भी प्रकार की असामान्य बात समझ में आती है तो उसकी जांच जरुर करानी चाहिए. इसको अनदेखा करने से समस्याएं बढ़ सकती है. जिसके कारण एक महिला को उसी के लिए लम्बा इलाज कराना पड़ सकता है.

कैसे करें स्वयं जांच

डॉक्टर साहनी ने कहा कि स्वयं जांच के लिए माहवारी शुरू होने के लगभग 10 दिन बाद का समय उचित माना जाता है. एक दिन तय कर जांच करें. यह प्रक्रिया थोड़ी असहज हो सकती है लेकिन बेहद जरुरी माना गया है. दाहिने हाथ से बायां स्तन और बाएं हाथ से दाहिने स्तन को गोल-गोल घुमाएं. जैसे ही कोई भी असामान्य बात नजर आती हो, मसलन करने से किसी भी प्रकार का दर्द होता हो. निपल्स से किसी भी प्रकार सा स्राव होता है तो इसकी तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं.

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क्यों जरुरी है स्वयं जांच

डॉक्टर साहनी की माने तो स्वयं जांच के बिना मैमोग्राफी के लिए जाना बेकुफी है. स्वयं जांच के दौरान खासतौर से तीन बातों का ध्यान रखा जाना जरुरी है. पहला किसी भी प्रकार का बदलाव नजर आए तो सावधान हो जाइए. दूसरा स्तन के स्किन के ऊपर कुछ भी असामान्य नजर आए तो सावधान हो जाइए. तीसरा सबसे जरूरी बात, अगर निपल्स से बिना छुए कोई तरल पदार्थ निकल रहा है तो उसे गम्भीरता से लीजिए. इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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कैसे होता है स्तन कैंसर

डॉक्टर साहनी ने बातचित के दौरान कहा कि यह एक पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन नाम का एक कम्पाउंड होता है. ये खाने के पदार्थो, मेकअप के समानों, पॉलीश, कास्मेटिक्स में पाया जाता हैं. इनका स्तन कैंसर से सीधा सम्बंध है. स्तन कैंसर का दूसरा कारण फास्ट फूड का बढ़ता चलन माना जाता है. जिसमें प्रोसेस्ड फूड और शुगर का अधिक प्रयोग होता है. आप शुगर का उपयोग जितना करेंगे, आप उतने ही मोटे होंगे. मोटापा कई बीमारियों का घर हो जाता है.

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