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ब्रजेश ठाकुर ने मनीषा दयाल को दी पॉपुलैरिटी, प्रातःकमल अखबार में अक्सर छपती थी खबर

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Neeraj Priyadarshi

Patna: बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड का मामला अभी थमा भी नहीं था कि पटना के राजीव नगर स्थित आसरा शेल्टर होम में दो संवासिनों की संदिग्ध अवस्था में मौत का मामला प्रकाश में आया है. शेल्टर होम के सचिव चिरंतन कुमार और कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल को पुलिस‌ ने गिरफ्तार कर लिया है. सोमवार को रिमांड पर लेकर पटना पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है.

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आसरा शेल्टर होम की कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल के गिरफ्तार होने के बाद पटना और बिहार की स्थानीय राजनीति में उबाल आ गया है.

पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं के साथ मनीषा की फोटो वायरल

मनीषा दयाल की स्थानीय नेताओं, ब्यूरोक्रैट्स (उनकी पत्नियां भी) और कथित बुद्धिजीवियों के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं. स्थानीय मीडिया में भी मनीषा दयाल पॉलिटिकल और सोशल कनेक्शन को लेकर दर्जनों खबरें छप चुकी हैं.

पटना के आसरा शेल्टर होम की कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल का कनेक्शन ब्रजेश ठाकुर से भी जोड़ कर देखा जा रहा है. समाज कल्याण विभाग में ब्रजेश‌ की गहरी पैठ थी. पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और चंद्रशेखर वर्मा के साथ ब्रजेश‌ के संबंध सामने आने पर मंत्री को इस्तीफा भी देना पड़ा है.

जहां‌ तक बात मनीषा दयाल और ब्रजेश ठाकुर के‌ साथ संबंधों को लेकर है‌ तो वह प्रात:कमल अखबार के इसी साल के 13 मई वाले संस्करण में देखने को मिलता है. जिसमें मदर्स डे ‌के उपलक्ष्य में मनीषा‌ दयाल के बयान को हेडिंग बनाकर चाक कॉलम की एक एंकर स्टोरी‌ छापी गई है.

प्रात:कमल अखबार की इस रिपोर्ट को देखने से बाद ये सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मनीषा के ब्रजेश के साथ पेशेवर‌ संबंध भी थे. क्योंकि प्रात:कमल अखबार ब्रजेश ठाकुर का बिजनेस था. उसने अपने बिजनेस के जरिए मनीषा‌ दयाल को भी व्यवसाय (पॉपुलैरिटी) दिलाने की कोशिश की.

प्रात: कमल के 13 मई के संस्करण की ये रिपोर्ट इसलिए भी संदेह पैदा करती है क्योंकि मनीषा को समाज कल्याण विभाग से आसरा होम चलाने का टेंडर भी इस साल मई से ही मिला है. ऐसा लगता है कि मनीषा को टेंडर दिलाने के लिए और अधिकारियों तक उसकी बात पहुंचाने के लिए ब्रजेश ठाकुर‌‌ ने मनीषा दयाल को अपने अखबार में जगह दी. क्योंकि इसके पहले भी मनीषा‌ दयाल की तस्वीरों के साथ खबरें प्रात: कमल के पहले पन्ने पर छपती आई हैं.

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मनीषा और चिरंतम पुलिस रिमांड पर
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इधर, राजधानी पटना के शेल्टर होम से दो संवासिनों के मौत का मामला आहिस्ता-आहिस्ता राजनीतिक रूप लेता जा रहा है. स्थानीय‌ कार्यक्रमों में नेताओं के साथ मनीषा की तस्वीरें आने से राजनीतिक गहमागहमी है. जिन नेताओं के‌ साथ मनीषा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, उन्होंने किनारा कर लिया है. मनीषा‌ के साथ‌ संबंधों से इन्कार करने लगे हैं.

पटना मेडिकल कॉलेज (पीएमसीएच) के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के अनुसार दोनों लड़कियों को शुक्रवार की रात को अस्पताल लाया गया था. लेकिन, वहां लाने से पहले ही दोनों की मौत हो गई थी. हालांकि, अभी तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं आयी है, इसलिए मौत के कारणों का भी खुलासा‌ नहीं हो‌‌ सका है.

पटना एसएसपी मनु महाराज के अनुसार, पुलिस को इस घटना की सूचना 36 घंटे बाद रविवार सुबह में मिली थी. दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम सूचना मिलने से पहले ही किया जा चुका था. इनमें से एक (नाबालिग) का अंतिम संस्कार शनिवार को ही कर दिया गया था. जबकि, दूसरी महिला के धर्म की जानकारी नहीं होने के कारण उसका रविवार तक अंतिम संस्कार नहीं किया गया. प्रशासन ने मामले को संदिग्ध मानकर इसकी जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया है.

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मामले में अभी तक चार लोगों के खिलाफ राजीव नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने आसरा गृह के सचिव चिरंतन कुमार और कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल को गिरफ्तार किया है. मजिस्ट्रेट नीतु पॉल के बयान के आधार पर राजीव नगर थाने में दर्ज एफआईआर में दोनों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. आसरा होम के एक डॉक्टर अंशुमन प्रियदर्शी और एक महिला नर्स को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

इधर, अपना बचाव करते हुए आसरा गृह की कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल ने बताया‌ कि दो संवासिनों की तबियत पिछले दो-तीन दोनों से खराब थी. उन्हें शुक्रवार की रात समय से दवाई नहीं दी जा सकी. देख-रेख करने वाली वहां मौजूद थीं लेकिन वह अनपढ़ थी. इसी वजह से वह उन्हें दवाई नहीं दे पाई. लेकिन सवाल यह खड़ा होता है सब कुछ जानते भी उनके स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था क्यों नहीं कि गई?

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आपको बता दें कि आसरा गृह अनुमाया ह्यूमन रिसोर्स फाउंडेशन की ओर से चलाया जा रहा है. इस गृह में कुल 74 संवासिनी रहती हैं. 12 को छोड़कर सभी की मानसिक स्थिति खराब है. गृह से चार लड़कियों के भागने के प्रयास‌ की सूचना पाकर पहुंची पुलिस शुक्रवार की सुबह ही वहां के‌ अधिकारियों से पूछताछ की थी. मगर तब किसी ने नहीं बताया कि संवासिनों की हालत ठीक नहीं है या फिर इलाज चल रहा है. फिर उसी रात आसरा गृह से दो लड़कियों की मौत‌ की खबर स्तब्ध कर देती है.

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आसरा गृह में संवासिनों को समय पर खाना नहीं दिया जाता था. जिसकी वजह से वहां की 74 में से 52 संवासिनी खून की कमी से जूझ रही हैं. दो संवासिनों की मौत की वजह कुछ भी हो. लेकिन इस घटना ने बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को फिर से बढ़ा दिया है. राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर इस मामले को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा है. तेजस्वी ने कहा कि पटना शेल्टर होम एक संगठित सेक्स रैकेट का अड्डा लग रहा है. पड़ोसी कह रहे हैं कि बेसहारा लड़कियों के पास रातभर बड़ी-बड़ी गाड़ियां आती थी. रात भर शेल्टर होम से लड़कियों के रोने और चीखने की अवाजें आती थीं.

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उन्होंने कहा कि 2 युवतियों की संदिग्ध हालात में मौत हुई और बिना पुलिस को जानकारी दिए पोस्टमॉर्टम हुआ. अब जांच की नौटंकी करने वाले पटना के डीएम और एसएसपी पहले कहां थे. नीतीश कुमार जी आपकी नाक के नीचे, मुख्यमंत्री आवास से चंद मिनटों की दूरी पर स्थित पटना के आसरा गृह में दो युवतियों की संदिग्ध मौत हुई. पुलिस को खबर नहीं, एक का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया.

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