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कानपुर में जन्मे थे बल्लेबाजों को रिवर्स स्वीप सिखाने वाले मशहूर कोच बॉब वुल्मर

जयंती पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : क्रिकेट में रूचि रखने वाले लोगों में से अधिकतर लोगों ने मशहूर क्रिकेट कोच का नाम तो जरूर सुना होगा पर शायद कम लोग ये बात जानते हैं कि उनका जन्म भारत में हुआ था. वुल्मर का जन्म 14 मई 1948 को कानपुर में हुआ था. बॉब वूल्‍मर क्रिकेटर कोच और कमेंटेटेर के रूप मे जाने जाते रहे.

दो देशों की तरफ से खेला क्रिकेट

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वूल्‍मर का जन्म भले ही भारत में हुआ था मगर उन्‍होंने क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत इंग्‍लैंड की राष्ट्रीय टीम से की थी. हालांकि बॉब के पिता क्‍लेयरेंस वूल्‍मर उत्‍तर प्रदेश के लिए रणजी क्रिकेट खेला करते थे.

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बॉब के पिता ने उन्‍हें कभी भारत में नहीं रखा. बॉब की पढ़ाई-लिखाई इंग्‍लैंड में हुई और उन्‍होंने वहीं पर क्रिकेट की एबीसीडी सीखी.

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इंटरनेशनल नहीं घरेलू क्रिकेट के थे बादशाह

क्रिकेटर बनने से पहले बॉब इंग्‍लैंड की एक केमिकल फैक्‍ट्री में सेल्‍समैन की नौकरी करते थे. मगर बॉब का सपना कुछ और था. उन्‍होंने इंग्‍लैंड की घरेलू क्रिकेट टीम केंट की तरफ से काउंटी क्रिकेट में हाथ आजमाया, जहां उन्‍हें काफी सफलता मिली. उस वक्‍त वह गेंद को स्‍विंग कराने में महारथ हासिल रखते थे, जिसकी वजह से बाद में उन्‍हें इंग्‍लैंड की वनडे नेशनल टीम में खेलने का मौका मिला.

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1972 में पहला इंटरनेशनल मैच खेला

1972 में बॉब ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला. धीरे-धीरे बॉब ने अपनी बल्‍लेबाजी में भी सुधार किया और एक आलराउंडर की भूमिका में आ गए. मगर वूल्‍मर को इंग्‍लैंड की तरफ से सिर्फ 6 वनडे और 19 टेस्‍ट मैच खेलने का मौका मिला. हालांकि प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका करियर शानदार रहा है. वूल्‍मर ने 350 प्रथम श्रेणी मैच खेले जिसमें उन्‍होंने 15,772 रन और 420 विकेट लिए.

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बतौर कोच ज्यादा सफल रहे

वूल्‍मर ने कोचिंग में ध्‍यान लगाया. उन्‍होंने सबसे पहले साउथ अफ्रीका की जूनियर क्रिकेट टीम को कोचिंग दी, हालांकि वह 3 साल से ज्‍यादा वहां रुक नहीं पाए. 1987 में वह इंग्‍लैंड वापस आ गए और घरेलू काउंटी क्रिकेट टीम वारविकशॉयर के कोच बन गए.

इसके बाद 1994 में वूल्‍मर को साउथ अफ्रीका की राष्ट्रीय टीम का कोच बनाया गया. पहले तो उनकी कोचिंग में अफ्रीकी टीम हारती गई मगर एक साल बाद टीम अपने करीब 75 परसेंट मैच जीतती थी. साउथ अफ्रीकी कोच के रूप में 5 साल पूरे करने के बाद वूल्‍मर वापस अपने वतन लौट आए.

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क्रिकेट में पहली बार कंप्‍यूटर एनालिसिस का इस्तेमाल

यही नहीं क्रिकेट में पहली बार कंप्‍यूटर एनालिसिस करके खिलाड़ियों की कमी और मजबूत पक्ष बताने का श्रेय वूल्‍मर को जाता है. वह विकेटकीपर को गोलकीपर की तरह गेंद पकड़ने को कहते थे, ताकि गेंद छूट न सके.

ईयर फोन लगाकर अफ्रीकी कप्‍तान से करते थे बात

1999 वर्ल्‍डकप में वूल्‍मर का एक प्रयोग काफी विवादित रहा था, उस वक्‍त वूल्‍मर साउथ अफ्रीकी टीम के कोच थे वह मैदान में अफ्रीकी कप्‍तान के साथ ईयर फोन लगाकर बीच मैच में बात करते थे. बाद में आईसीसी ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.

बॉब वूल्‍मर का कोचिंग का तरीका हमेशा से अलग रहा. वह क्रिकेट में नई-नई टेक्‍निक ईजाद करते थे. 90 के दशक में बल्‍लेबाजों को रिवर्स स्‍वीप सिखाना बॉब वूल्‍मर ने ही सिखाया.

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आयरलैंड से हारा पाकिस्‍तान, कमरे में मृत मिले बॉब

इसके बाद 2004 में उन्‍हें पाकिस्‍तान क्रिकेट टीम के कोच की जिम्‍मेदारी सौंपी गई, हालांकि अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करते उससे पहले उनकी संदिग्‍ध स्थिति में मौत हो गई थी. दरअसल 2007 वर्ल्‍डकप में आयरलैंड के हाथों पाकिस्‍तान की हार के कुछ घंटे बाद वूल्‍मर अपने कमरे में मृत पाए गए थे.

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