JharkhandLead NewsRanchi

झारखंड में पंचायतों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभायेंगी अनु दीदी, जानिए कौन हैं ये?

Amit Jha

Ranchi : गांव, पंचायतों को और सबल बनाने की एक और पहल किये जाने की तैयारी है. ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज, झारखंड) की ओर से अनुसमर्थन दीदी (ANU DIDI Accelerated but Natural Uplifting of Panchayats) की सेवाएं लिये जाने का विचार हुआ है. ग्राम पंचायतों को मजबूत बनाये जाने, ग्राम सभा के नियमित आय़ोजन, ग्राम विकास योजनाओं का लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप डिजाइन किये जाने में इन दीदियों की अहम भूमिका होगी.

यानी सरकार और गांव के बीच की कड़ी को और मजबूत बनाया जायेगा. राज्य में 4356 पंचायतें हैं. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत राज्य में फिलहाल 91 प्रखंडों के 456 ग्राम पंचायतों में अनुसमर्थन केंद्र स्थापित किये जाने और अनुसमर्थन दीदी की सेवाएं लिये जाने की योजना है.

Catalyst IAS
ram janam hospital

पंचायत भवनों से जुड़ेंगी दीदी

The Royal’s
Sanjeevani
Pitambara
Pushpanjali

पंचायती राज विभाग अनुसमर्थन दीदी के जरिये गांव में विकास की गति तेज होने की संभावनाओं को आंक रहा है. अभी हालांकि ट्रायल के तौर पर अनुसमर्थन दीदी के कंसेप्ट पर विभाग काम करेगा. फिलहाल 4-5 महीनों के लिए इनकी सेवाएं लेकर उसकी उपयोगिता का आकलन किया जायेगा. राज्य में 4356 पंचायतों में से 4230 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन की सुविधा उपलब्ध है. जानकारी के मुताबिक RGSA के तहत 91 प्रखंडों के लिए प्रशासनिक और तकनीकी सहायता के रूप में प्रति प्रखंड 50,000 रुपये की व्यवस्था है.

इन प्रखंडों की 546 पंचायतों में दो-दो अनुसमर्थन दीदी सेवाएं देंगी. पंचायत भवन में 10 बजे से 1 बजे तक बैठेंगी. ग्राम सभाओं के नियमित आय़ोजन औऱ लोगों की डिमांड के अनुसार ग्राम विकास योजनाओं (जीपीडीपी) के चयन और उसे धरातल पर उतारने में रोल प्ले करेंगी. सरकारी योजनाओं, पेंशन सेवाओं में समस्या आने पर ग्रामीणों को ब्लॉक या जिला प्रशासन के पास नहीं दौड़ना होगा. दीदी के पास ही जाकर वे अपनी बात रख सकेंगे. इसके एवज में उन्हें पावती रसीद भी मिलेगी जिससे वे पता लगा सकेंगे कि आखिर उसका निदान हुआ कि नहीं.

कैसे आया अनुसमर्थन दीदी का विचार

लंबे अरसे के बाद 2010 में राज्य में पहली बार पंचायती राज व्यवस्था बहाल हुई. पंचायत चुनाव हुए. पर यह देखा गया कि मैनपावर की कमी के कारण पंचायतों के सामने अब भी चुनौतियां हैं. 4356 पंचायतों में अभी 1977 पंचायत सचिव ही काम कर रहे हैं. उन पर कार्यों का भार बहुत ही ज्यादा है. एक पंचायत सचिव कई अन्य पंचायतों के प्रभार में भी हैं. अनुसमर्थन दीदी के सहयोग से कुछ हद तक पंचायतों के कामकाज में सहूलियत की संभावनाएं बढ़ेंगी.

जेएसएलपीएस से सहयोग

अनुसमर्थन दीदी तैयार करने को जेएसएलपीएस (ग्रामीण विकास) से मदद ली जायेगी. कम्युनिकेशन स्किल, दूसरों को साथ में लेकर चलने की कला, एंड्रायड मोबाइल का उपयोग करने जैसे हुनर के आधार पर दीदी की जवाबदेही एसएचजी मेंबर को दी जायेगी. दीदी को ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षित किया जाना है. दीदी के लिए अन्य दायित्वों, प्रावधानों को अंतिम रूप देकर जल्दी ही इस संबंध में विभाग पहल करेगा.

ग्रामसभा के सशक्तीकरण की पहलः निदेशक

पंचायती राज निदेशक आदित्य रंजन के अनुसार ग्राम सभाओं की महत्ता को मजबूती से स्थापित किये जाने की जरूरत है. इसके जरिये ली जाने वाली योजनाओं और उस पर कार्यान्वयन से गांव पंचायतों की वास्तविक जरूरतों की परख होगी और जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी. अनुसमर्थन दीदी इसमें एक बड़ी दूत बन सकती हैं.

Related Articles

Back to top button