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बचपन के मुश्किल अनुभवों से निपटने में मदद करेगी किताब

द अम्मुची पुची ’’ प्रेम , बिछोह और उम्मीद के खट्टे-मीठे अनुभवों की कहानी है

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New Delhi : बचपन के बहुत से एसे अनुभव होते हैं जिससे लोग निकल नहीं पाते हैं. खासकर बच्चों पर इसका गहरा असर होता है. और इस मुश्किल से निकलने में उन्हें काफी वक्त लगता है. एक नई किताब में बचपन के मुश्किल अनुभवों और इस दुख और उसके समाधान के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है. शरण्या मनीवन्नन की चित्रात्मक किताब ‘‘ द अम्मुची पुची ’’ प्रेम , बिछोह और उम्मीद के खट्टे-मीठे अनुभवों की कहानी है. इसमें इलस्ट्रेशन का काम नेरिना कांजी ने किया है. लेखिक कहती हैं ‘ द अमुची पुची ’ प्रिय दादा – दादी से बिछोह से बच्चों को निपटने में मदद करने के लिये लिखी गई है. आदित्य और अंजलि ने अपनी दादी को खो दिया और फिर प्रकृति में उन्हें इस दुख से राहत नजर आई. उन्होंने कहा कि यह किताब दर्द , अलौकिकता, अनंत प्रेम और कल्पना की शक्ति के बारे में है.

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किताब का प्रकाशन पुफिन (पैंगुइन रैंडम हाउस इंडिया) ने किया है. किताब आदित्य और अंजलि नाम के दो बच्चों और उनकी दादी आमुची के बारे में है. ये बच्चे अपनी दादी से कहानियां सुनना बेहद पसंद करते थे खास तौर पर पेड़ों पर भूतों की डरावनी कहानियां. एक रात उनकी दादी का निधन हो गया और उन्हें ऐसा लगा कि उनकी सारी कहानियों का अब कोई मतलब नहीं रह गया. और फिर प्रकृति में उन्हें इस दुख से राहत नजर आई. जिसके बाद वो इस मुश्किल अनुभव से बाहर निकले.

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