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मैथिली संस्कृति के प्रचार के साथ समाप्त हुआ पुस्तक मेला, मैथिली पुस्तकें रहीं खास आकर्षण

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Ranchi : मिथिला की कला, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के प्रचार के लिए झारखंड मैथिली मंच का दो दिवसीय मैथिली पुस्तक मेला का रविवार को समापन हुआ. इस दौरान मिथिला साहित्य, संस्कृति एवं पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हुई. आयोजन में रांची, पटना, दरभंगा, जमशेदपुर, दिल्ली के पुस्तक प्रकाशकों सहित साहित्य प्रेमी, छात्र, प्रबुद्ध लोग तथा ख्यातिप्राप्त मैथिली भाषा के साहित्यकार एवं कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. मेले में इस बार हरिमोहन झा की पुस्तकें,  चंदा झा के मैथिली सहित, मैथिली-हिंदी शब्दकोश और व्याकरण की किताबों की भी लोगों के बीच काफी मांग रही. रविवार को हुए समापन में जहां कई लोगों ने शिरकत की, वहीं झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हरिश्चंद्र मिश्रा सहित कई साहित्यकार एवं पुस्तक प्रेमी भी उपस्थित थे. इस वर्ष लगनेवाले मेले में भाग लेनेवाले प्रकाशकों में दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी, पटना स्थित मैथिली साहित्य अकादमी, दरभंगा स्थित कल्याणी फाउंडेशन के अलावा साहित्यिक प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, जनसीदन प्रकाशन, रुना प्रकाशन ने भी भागीदारी की. कार्यक्रम के दौरान मैथिली संस्कृति से जुड़े साहित्य,  व्याकरण,  उपन्यास,  ज्योतिष,  गीत,  आत्मकथा,  पंचांग से जुड़ी पुस्तकें भी उपलब्ध थीं.

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मैथिली संस्कृति से जुड़ी किताबों को लोगों तक पहुंचाना है मुख्य उद्देश्य

मैथिली पुस्तक मेला लगाने के उद्देश्य की चर्चा करते हुए झारखंड मैथिली मंच के उपाध्यक्ष जयंत कुमार झा ने बताया कि इसके माध्यम से लोगों के बीच मैथिली संस्कृति से जुड़ी किताबों को पहुंचाना है. आज भी मैथिली संस्कृति से जुड़ी किताब मिलने में काफी परेशानी होती है. यह विशेष मेला लगाकर मैथिली भाषियों को पुस्तक उपलब्ध कराना उद्देश्य रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से मैथिली मंच लगातार इस तरह का आयोजन करता आ रहा है. हालांकि, इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक से मंच को किसी तरह का कोई सरकारी सहयोग नहीं मिलने की बात भी उन्होंने कही. उन्होंने कहा कि अगर इसके लिए भविष्य में किसी तरह की कोई सहायता दी जाती है, तो मंच उनका स्वागत करने में भी पीछे नहीं हटेगा.

लोगों का होता रहा मिलना-जुलना : ज्योति मिश्रा

मैथिली मेला लगाने से तीन वर्षों में हुए परिवर्तन की बात करते हुए मैथिली गायिका ज्योति मिश्रा ने कहा कि मेला लगने से लोगों के बीच मिथिला की कला, संस्कृति, भाषा और साहित्य काफी फैला है. मिथिला की संस्कृति और सभ्यता की जानकारी इसी मेले के माध्यम से लोगों को दी जाती रही है. इस मेले में न केवल मैथिलीभाषी, बल्कि गैर मैथिलीभाषी साहित्य एवं पुस्तकप्रेमियों को भी जोड़ा गया है. इस दौरान लोगों का एक-दूसरे से मिलना-जुलना भी होता रहा है.

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चित्रांकन कार्यक्रम में बच्चे हुए सम्मानित

समापन कार्यक्रम के दौरान रविवार को बच्चों के लिए चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इसमें जूनियर ग्रुप में भव्या सिंह प्रथम, यशी सिंह दूसरे स्थान पर रहीं. वर्ग 1 से 4 तक के बच्चों की श्रेणी में ऋषभ राज सुमन को प्रथम, श्रीजीत राज को दूसरे, और वैष्णवी राज को तीसरे तथा वर्ग 5 से 10 तक के बच्चों की श्रेणी में रश्मि को प्रथम, शाम्भवी दूसरे और ऋषभ राज तीसरे स्थान पर रहे.

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