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बोकारो बीजेपी में ‘बम’ फैक्टर का बवाल, त्रिकोणीय अंतर्कलह से कार्यकर्ता बेहाल

Akshay Kumar Jha

Bokaro: आज-कल बोकारो बीजेपी ‘बम’ (बिरंची, बाटुल और मयंक) फैक्टर से परेशान हैं. पार्टी में घमासान मचा हुआ है. विधायक बिरंची नारायण अपनी ही पार्टी के कई लोगों के निशाने पर हैं. वजह पूछने पर बताया जाता है कि बोकारो में पार्टी वन मैन शो बन कर रह गयी है. बोकारो में बीजेपी विधायक बिरंची से शुरू और बिरंची पर ही खत्म हो रही है. ऐसा नहीं है कि विवाद सिर्फ सीनियर नेताओं के बीच है, बल्कि जूनियर भी खूब सिरफुट्टवल कर रहे हैं. जहां बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर प्रसाद महतो उर्फ बाटुल बिरंची से भिड़े हुए थे वहीं अब बोकारो के भाजयुमो के पूर्व अध्यक्ष मयंक सिंह एंड फ्रेंड्स भी दो-दो हाथ आजमा रहे हैं. कुल मिलाकर बोकारो बीजेपी के बिरंची, बाटुल और मयंक सिंह कमर कसकर रिंग में उतर चुके हैं. फाइट जारी है, मजा सभी ले रहे हैं.

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मयंक सिंह ने छोड़ी पार्टी थामा जदयू का हाथ

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मयंक सिंह के बाद बोकारो भाजयुमो के अध्यक्ष विनोद प्रजापति बने. मयंक सिंह एंड फ्रेंड्स अपने आप को ठगा हुआ समझने लगे. कहा जाने लगा कि सभी कुछ विधायक बिरंची के इशारे पर ही हुआ है. वैसे मयंक और उसके समर्थक शुरू से ही बिरंची पर हमलावर थे. पार्टी में रहते हुए मयंक सिंह के समर्थक खुलेआम बिरंची को सोशल मीडिया पर निशाने पर रखते थे. कई बार भाजयुमो के कार्यकर्ता बिरंची नारायण को चैलेंज भी करते दिखे. यहां तक कि विधानसभा चुनाव में भी भाजयुमो के कुछ लोगों का साथ बिरंची को नहीं मिला. आखिरकार अध्यक्ष पद गंवाने के बाद मयंक एंड फ्रेंड्स ने पार्टी ही छोड़ देने का फैसला किया और जदयू का हाथ थाम लिया.

जदयू में शामिल होने की कवायद को मयंक एंड फ्रेंड्स अच्छे से भुनाने में लगी है. गाड़ियों की लंबी कतार में रांची पहुंचने का प्रोग्राम बनाया गया. बकायदा बोकारो से लेकर रांची तक मयंक सिंह के पोस्टर और बैनर टागे गए. खास कर बीजेपी के प्रदेश कार्यालय से 200 मीटर की दूरी पर भी पोस्टर और बैनर टंगे ताकि रांची में बैठे अन्य पदाधिकारियों की नजर इसपर जाए. मामले पर न्यूज विंग ने मयंक सिंह से बात की उन्होंने कहा कि बोकारो में बीजेपी एक ही आदमी बिरंची नारायण से शुरू और और उन्हीं के नाम पर खत्म होता है. यहां तक कि बोकारो के जिलाध्यक्ष भी बिरंची के इशारे पर ही सारा काम कर रहे हैं. इसी बात से नाराज करीब 250 युवा बीजेपी छोड़ जदयू का हाथ थाम रहे हैं.

बाटुल और बिरंची प्रेस कॉन्फ्रेस कर लगा रहे एक दूसरे पर आरोप

बोकारो विधायक बिरंची नारायण और बेरमो के पूर्व विधायक के बीच जंग 26 सितंबर से शुरू हुई. बोकारो में विस्थापितों की मांग को लेकर बाटुल ने बोकारो विधायक और उनके परिवार पर निशाना साधा. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास जमीन की खरीद-फरोख्त की बात कही थी. इस पर बिरंची ने 27 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगेश्वर महतो पर निशाना साधते हुए आरोप साबित करने और ऐसा नहीं करने की स्थिति में दो करोड़ राशि का मानहानि का दावा ठोकने की बात कही. इसपर बाटुल ने पांच अक्टूबर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और जनअदालत में दोष साबित करने पर बिरंची नारयण और उनके पिता का जूता अपने सिर पर लेने की बात कही. इतना ही नहीं दोनों के समर्थक लगातार सोसल मीडिया पर एक-दूसरे पर निशाना साधने का काम कर रहे हैं.

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