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बोकारो का भस्की पंचायत विकास से कोसो दूर, गांव में ना सड़क-ना ही पुल

एक स्कूल था सरकार ने वो भी करा दिया बंद

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Bokaro: साल 2018, इक्कीसवीं सदी का 18 वां साल. गुलाम भारत को आजाद हुए 72 साल हो गये. जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से भरे हमारे राज्य झारखंड के अलग हुए 18 साल हो गये. वैसे तो हमारा राज्य भी बालिग हो गया, लेकिन विकास की रोशनी सूबे के कई गांवों को छू भी नहीं पायी है. कुछ ऐसा ही है, बोकारो जिले का एक पंचायत. जहां इस आधुनिक युग में भी लोगों को बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं.

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गांव में ना सड़क -ना पुल

जिले के जरीडीह प्रखंड के भस्की पंचायत में आजतक विकास की रोशनी नहीं पहुंची. इस इलाके में आज भी ना तो सड़क है, ना ही पुल. ना ही दूसरी बुनियादी सुविधाएं. हालात ये है कि गांव के लोग आज भी पीने का पानी नदी और नाले से ही लाते हैं. बांस के पुल के सहारे अन्य इलाकों से लोगों ने खुद को जोड़े रखा है.

अगर बारिश हो जाए और गांव का कोई बीमार पड़ जाए तो उसका ठीक होना भगवान के भरोसे ही है. नदी में पानी भर जाने की स्थिति में किसी मरीज को 35 किमी दूर जैनामोड़ ले जाना लगभग असंभव हो जाता है. यही नहीं कई बार जैनामोड़ ले जाने के क्रम में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. भस्की पहुंचते-पहुंचते सरकार के विकास के दावे और योजनाएं हवा-हवाई हो जाते हैं.

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बांस का पुल पार कर बच्चे जाते हैं स्कूल

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भस्की पंचायत के लाहरजार गांव की कुल आबादी लगभग 150 है. गांव जाने के लिए ना ही पुल है और ना सड़क. बच्चों के लिए एक स्कूल था वो भी सरकार ने बंद करा दिया गया. अब बच्चों को पढ़ने के लिए बांस के पुल से होकर 2 किमी दूर बाधागोड़ा जाना पड़ता है. बरसात के दिनों में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

क्या कहती हैं गांव की मुखिया

भस्की पंचायत की मुखिया सुनिता कुमारी लाहरजारा गांव की निवासी है. मुखिया ने कहा पुल के अभाव के कारण विकास कार्य लाहरजारा में नहीं हो पा रहा है. अन्य समस्याएं भी काफी है. यहां सरकार को गंभीरता से काम करने की जरुरत है. वही मुखिया के दायरे में जितना संभव है काम करने का प्रयास किया जा रहा है.

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वही आम आदमी पार्टी के बोकारो जिला संयुक्त सचिव कमाल हसन ने कहा कि गांव के बाहर जलस्रोत वाले इलाके में डीप बोरिंग कर जल मीनार बनाकर पाइप लाइन के मार्फत इस गांव में जलापुर्ति सुविधा दी जा सकती थी. लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि ने ऐसा नहीं किया.

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