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बोकारोः विकास से अछूता बांधघुटू टोला, आज तक नहीं बनी सड़क

पांच सालों में एक बार भी सांसद को नहीं आयी बांधघुटू के आदिवासी परिवारों की याद

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Prakash Mishra

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Bokaro: ‘सबका साथ-सबका विकास’ इस नारे के साथ केंद्र में मोदी की सरकार सत्ता में काबिज हुई. झारखंड की रघुवर सरकार ने भी इस नारे को कई मंच से बुलंद किया. लेकिन ये विकास बोकारो के बांधघुटू टोला में कहीं नजर नहीं आता.

40 संताल आदिवासी परिवार इस टोला में रहते हैं. लेकिन इतने सालों में भी यहां पहुंचने के लिए ना तो सड़क बनी है, ना ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था ही है.

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40 आदिवासी परिवारों को विकास का इंतजार

जिले के चास प्रखंड स्थित सुनता पंचायत में स्थित है बांधघुटू टोला. जो पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के गांव से सटा हुआ है. इस टोले में करीब 40 संताल आदिवासी परिवार रहते है, लेकिन इनके टोले तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है.

कई बार गांव के लोगों ने चास प्रखंड के अधिकारियों को आवेदन भी दिया, लेकिन सड़क आज तक नहीं बन सकी है.

चुनाव में याद आयेगी जनता

अब लोकसभा चुनाव होने को है. ऐसे में फिर से यहां पर हर दलों के नेताओं का आना शुरु हो जायेगा. हर नेता और उनके कार्यकर्ता गांव में पहुंच कर हर समस्याओं को दूर करने का आश्वासन देंगे.

जबकि बीते पांच सालों में सांसद पीएन सिंह का दर्शन इस पूरे पंचायत के किसी भी टोले के लोगों को नहीं हुआ है. बांधघुटू के लोग सिर्फ यह जानते है कि उनका सांसद भाजपा का है, लेकिन कौन है उसे अभी तक नहीं देखा है.

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आदिवासी होने का खामियाजा उठा रहे ग्रामीण

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बांधघुटू के रहने वाले बाबा महेश्वर सोरेन ने बताया कि वर्षो पूर्व सड़क बनाने को लेकर पहल की गई थी. कुछ दूर रैयती जमीन है. जिस कारण सड़क नहीं बन पा रही है. जबकि सरकारी स्तर से प्रयास हो तो गांव के लिए सड़क बन सकती है.

उन्होंने कहा कि सांसद पिछले चुनाव में आये हुए थे. उसके बाद नहीं आये. साथ ही कहा कि आदिवासी को भाजपा के लोग अपना नहीं मानते. जिस कारण सांसद हो या विधायक कभी सुनता के गांवों पर ध्यान नहीं दिया. ऐसे में बांधघुटू की सड़क बने भी तो कैसे.

पांच वर्षो में सांसद मद की एक भी योजना ‘सुनता ‘नहीं पहुंची

सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल मांझी ने कहा कि धनबाद संसदीय क्षेत्र में चास प्रखंड का सुनता ही एक ऐसा पंचायत होगा. जहां पर पांच वर्षों में सांसद मद की एक भी योजना नहीं पहुंची है. जबकि पीएन सिंह यहां से लगातार दो बार चुनाव जीतते रहे हैं.

सुनता पंचायत में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत दो किलोमीटर की पक्की सड़क बनी. उसके बाद ऐसी कोई योजना नहीं आयी. जिसका लाभ यहां के आदिवासी परिवारों को मिल सके. इस पंचायत में अभी तक पंचायत भवन भी नहीं है.

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सिंचाई तो दूर पीने के पानी की रहती है किल्लत

सुनता पंचायत के एक किनारे होकर इजरी नदी बहती है. वहां से पानी को लिफ्ट कर किसानों के खेतों में पहुंचाया जा सकता है. जिससे काफी किसान अनाज और सब्जी का उत्पादन कर सकते थे, लेकिन इस दिशा में कोई पहल विभाग या सांसद की ओर से अब तक नहीं की गई.

लोगों का कहना है कि सिंचाई तो दूर पीने के पानी की किल्लत हर टोले में गर्मी आते ही होने लगती है. 14 टोले के इस पंचायत में आधे से अधिक चापानल हर वक्त खराब ही रहते हैं. जबकि तीन तालाब है, उसमें भी इस बार वर्षा नहीं होने के कारण पानी कम हो गया है. गर्मी आते ही लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

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