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बोकारो थर्मल : शहीद की पत्नी ने कहा, सिर्फ घोषणा करती है सरकार, न नौकरी मिली, न आवास

18 मई 2018 को पाकिस्तान की ओर से किये गये फायरिंग में बीएसएफ जवान सीताराम शहीद हो गये थे

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Sanjay

Bermo : बोकारो थर्मल में शहीद बीएसएफ जवान सीताराम उपाध्याय की पत्नी रेशमी उपाध्याय ने सूबे के राज्य सरकार पर शहीदों को लेकर की जाने वाली घोषणा पर उपेक्षा का आरोप लगाया है. कहा कि राज्य सरकार सीमा पर शहीद होने वाले जवानों के आश्रितों को दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर सिर्फ घोषणाएं ही करती है, उसे धरातल पर उतारने में आश्रितों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है.

10 माह पूर्व कश्मीर के अर्निया सेक्टर में शहीद हुये थे सीताराम

गिरिडीह जिला अंतर्गत मधुबन पालगंज के रहने वाले बीएसएफ के जवान सीताराम उपाध्याय कश्मीर के अर्निया सेक्टर में तैनात थे. 18 मई 2018 को पाकिस्तान की ओर से किये गये फायरिंग में बीएसएफ जवान सीताराम शहीद हो गये थे. शहीद का पार्थिव शरीर जब झारंखड पहुंचा तो राज्य सरकार ने शहीद जवान की पत्नी रेशमी उपाध्याय को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने, घर बनाने के लिए जमीन, पालगंज में तोरण द्वार, शहीद सीताराम की प्रतिमा आदि लगाने की घोषण की थी.

शहीद की पत्नी ने लगाया उपेक्षा का आरोप

शहीद सीताराम की पत्नी रेशमी उपाध्याय के जख्म कश्मीर के पुलवामा में शहीद सीआरपीएफ के शहीद 40 जवानों की घटना के बाद ताजा हो गये. आंखों में डबडबायी आंसू लिये पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहती है कि घटना के बाद निंदा, जुलूस, प्रदर्शन, कैंडल मार्च, समेत सरकारी घोषणाओं के दौर का सिलसिला महज 10-15 दिनों तक चलता है, फिर शहीद का परिवार किस प्रकार जीवन यापन कर रहा है, जो घोषणाएं हुई वह धरातल पर लाया गया या नहीं, इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं होता है.

कठिन हो गया है जीवन यापन

रेशमी कहती है कि बीएसएफ की ओर से जो राशि मिली उससे गुजर बसर किया जा रहा है. दो छोटे बच्चे 2 और 3 वर्ष के हैं. इसके अलावा अंधे ससुर, बीमार सास सहित खुद के मां एवं बाप हैं. जिसका गुजर बसर करना है. जो राशि मिली है उससे गुजर बसर हो रहा है लेकिन चिंता है कि वह समाप्त हो जाएगा तो दो छोटे बच्चों समेत बाकी परिवार के सदस्यों का क्या होगा. ससुर को आज तक पेंशन मिलना आरंभ नहीं हुआ है.

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10 माह से लगा रही है दफ्तरों का चक्कर

राज्य सरकार के द्वारा घोषित अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने को लेकर विगत 10 माह से गिरिडीह एवं रांची के दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं. परंतु कोई सुनने वाला नहीं है. सीएम के जनसंवाद में भी फरियाद लगायी तो कहा गया कि बीएसएफ से पेपर एवं एनओसी नहीं आया है. बीएसएफ वाले का कहना है कि सभी पेपर एवं एनओसी राज्य सरकार को भेज दिया गया है. मनोज कुमार जब गिरिडीह के डीसी थे तो एक बार अनुकंपा कमेटी की बैठक हुई थी, उसके बाद क्या हुआ आज तक पता नहीं चला.

बेटा को भी भेजेगी आर्मी में

पति की शहादत के बाद भी रेशमी के इरादे देश भक्ति को लेकर बुलंद हैं. कहती हैं बेटा जब बड़ा हो जाएगा तो उसे भी आर्मी में फर्ती कराउंगी. उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि अपने घरों से एक व्यक्ति को आर्मी में जरुर भेजें ताकि वह देश की सेवा कर सके.

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