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बोकारो थर्मल डिग्री कॉलेजः डीवीसी ने नहीं दी जमीन, 25 वर्षों से बिना संबंद्धता के ही चल रहा कॉलेज

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Bermo:  बोकारो थर्मल स्थित एकमात्र डिग्री कॉलेज को डीवीसी प्रबंधन द्वारा भूमि नहीं दिये जाने के कारण 25 वर्षों बाद भी इसे विश्वविद्यालय से संबद्धता नहीं मिल पायी है.

विश्वविद्यालय से संबद्धता नहीं मिल पाने के कारण बेहतर परीक्षा परिणाम के बाद भी कॉलेज के परीक्षार्थियों का परीक्षा फार्म दूसरे कॉलेज से भरवाना पड़ता है. इस और न तो डीवीसी प्रबंधन गंभीर दिखायी देता न ही स्थानीय नेता.

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1994 में कॉलेज की हुई थी स्थापना

डीवीसी के कर्मी तथा प्रमुख शिक्षाविद तीन विषयों में पीएचडी करने वाले श्रद्धानंद पांडेय, बेसिक स्कूल के तत्कालीन एचएम रामेश्वर ठाकुर, राजगोविंद सिंह शास्त्री आदि ने मिलकर स्थानीय बेसिक स्कूल के दो कमरों में सांघ्यकालीन बोकारो थर्मल डिग्री कॉलेज की स्थापना 12 दिसंबर 1994 की थी.

इससे पहले डिग्री कॉलेज के नहीं रहने के कारण कमजोर तबके के छात्र आगे की पढ़ाई करने में कठिनाई का सामना करते थे.

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6 वर्ष बाद कॉलेज को सहायता के लिए शासी निकाय का गठन हुआ

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स्थापना के 6 वर्ष बाद कॉलेज को सहायता के लिए कॉलेज शासी निकाय का गठन किया गया. अध्यक्ष सूबे के तत्कालीन ऊर्जा मंत्री लालचंद महतो को बनाया गया. संबद्धता के लिए प्रयास किये गये तो भूमि की समस्या आ खड़ी हुई. कॉलेज के पास 5 एकड़ की भूमि अनिवार्यता कर दी गयी.

सूबे के मंत्री लालचंद महतो के अलावा बाद में गिरिडीह के सांसदों में से टेकलाल महतो, रविंद्र कुमार पांडेय को भी कॉलेज का अध्यक्ष इसी उम्मीद में बनाया गया. लेकिन समस्या दूर नहीं हुई.  डीवीसी ने जमीन नहीं दी. स्थानीय प्रोजेक्ट हेड के माध्यम से भी डीवीसी अध्यक्ष से काफी प्रयास किये गये परंतु कॉलेज के लिए डीवीसी की ओर से 5 एकड़ भूमि का आवंटन नहीं हुआ.

700 छात्र हैं अध्ययनरत

वर्तमान में कॉलेज में 700 परीक्षार्थी अध्ययनरत हैं. प्राचार्य जीपी सिंह सहित नौ प्रोफेसर एवं सात शिक्षकेतर कर्मचारी कार्यरत हैं. कॉलेज प्रबंधन एवं शासी निकाय आज भी इसी उम्मीद में है कि डीवीसी से 5 एकड़ भूमि का आवंटन हो जायेगा.

इसके बाद कॉलेज को संबद्धता मिल जायेगी. इससे कॉलेज के दिन बहुरेंगे. मामले में डीवीसी के प्रोजेक्ट हेड कमलेश कुमार का कहना है कि भूमि का आवंटन मुख्यालय स्तर से ही हो सकता है.

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