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बोकारो  : आश्रित को नौकरी, पांच लाख मुआवजे पर सहमति बनी, मजदूर का शव हास्पिटल भेजा गया

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Bermo :  बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के 500 मेगावाट के पावर प्लांट में काम के दौरान सीएचपी के कन्वेयर बेल्ट में फंसने से एक मजदूर की मौत बुधवार सुबह लगभग दस बजे घटनास्थल पर ही हो गयी.  बता दें कि कन्वेयर बेल्ट के रॉलर में फंसे मजदूर का शव काफी मशक्कत के बाद लगभग एक घंटे बाद निकाला जा सका. घटना के बाद पावर प्लांट में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के द्वारा मुआवजा की मांग को लेकर शव को रखकर प्रदर्शन किया गया.

500 मेगावाट के ए पावर प्लांट में सीएचपी के वार्षिक रख-रखाव का काम करने वाली कंपनी लोकनाथ कंस्ट्रक्शन में ये हादसा हुआ. जहां प्रफुल्ल मेहता उर्फ मुन्ना बुधवार को 18 नंबर बंकर में कोयला के कन्वेयर बेल्ट में क्लिनिंग का काम कर रहा था.

मृतक मजदूर के आश्रित को मुआवजा तथा आश्रित को नियोजन के लेकर पावर प्लांट में  प्रबंधन के साथ सकारात्मक वार्ता होने के बाद  शव अपराहन साढ़े चार बजे पावर प्लांट से उठा लिया गया. वार्ता में डीवीसी की ओर से प्रोजेक्ट हेड कमलेश कुमार,सीई निखिल कुमार चैधरी,डीजीएम पीके सिंह,अपर निदेशक नीरज सिन्हा,यूनियन प्रतिनिधियों में से ब्रजकिशोर सिंह,नवीन कुमार पाठक,असीम तिवारी,प्रमोद कुमार सिंह,सदन सिंह,गणेश राम,शिवजी यादव,बिनोद दूबे,रज्जाक अंसारी,प्रदीप कुमार विश्वास,भागीरथ शर्मा,श्याम बिहारी सिंह दिनकर,संजय मिश्रा,रामचंद्र ठाकुर,रघुवर सिंह,अख्तर खान,सरजू ठाकुर,मो फरीद,आरपी वर्मा सहित लोकनाथ कंपनी की ओर से बिपुल सिन्हा,सोनू आलम सहित कई लोग मौजूद थे.

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वार्ता में बनी सहमति

वार्ता में तय किया गया कि मृतक के आश्रित को लोकनाथ कंपनी में 13 मई से नियोजन दिया जाएगा,काम का ठेकेदार बदले जाने पर मृतक के आश्रित को एएमसी एवं एआरसी में कार्यालय के हलके में काम में रखा जाएगा. कंपनी की ओर से आश्रित को 5 लाख रुपये दिये जाएंगे.  जिसमें से तत्काल 25 हजार रुपया दिया जाएगा तथा बाकी का 4 लाख 75 हजार रुपये का भुगतान 6 मई तक किया जाएगा. सरकारी सुविधा के तहत ईएसआई तथा ईपीएफ के द्वारा मिलने वाली सुविधा एवं राशि कंपनी के द्वारा मुहैया करायी जाएगी .वार्ता के बाद शव को डीवीसी के एम्बुलेंस से हास्पिटल भेजा गया.

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कंपनियां सेफ्टी नियमों का अनुपालन नहीं करती

बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के पावर प्लांट में पावर प्लांट का निर्माण करने एवं वार्षिक रखरखाव का काम करनेवाली कंपनियां सेफ्टी नियमों का अनुपालन नहीं करती हैं. खबर है कि पावर प्लांट का सेफ्टी विभाग पूरे वर्ष मूकदर्शक की भूमिका में रहता है और किसी दुर्घटना या घटना के बाद वह हरकत में आता है. पावर प्लांट में सीएचपी के वार्षिक रखरखाव का काम करनेवाली कंपनी लोकनाथ कंस्ट्रक्शन सहित अन्य कंपनियों के कामों में प्रावधान के तहत डीवीसी के इंजीनियर का कार्यस्थल पर होना आवश्यक   है और उसी के सुपरविजन में कंपनियों को काम करना होता है.परंतु पावर प्लांट में काम करनेवाली कंपनियों के कार्यस्थल से डीवीसी के इंजीनियर अनुपस्थित रहते हैं.

बुधवार को भी सीएचपी का काम करनेवाली कंपनी लोकनाथ की साईट पर कोई भी इंजीनियर मौजूद नहीं था. कार्यस्थल पर डीवीसी का इंजीनियर मौजूद रहकर अपने सुपरविजन में काम करवाता तो शायद मजदूर प्रफुल्ल की मौत नहीं होती.

इसके अलावा लोकनाथ सहित काम करनेवाली कंपनियों के द्वारा काम करने वाले मजदूरों को सेफ्टी के लिहाज से जूता,हेल्मेट,माउथ मास्क तथा दास्ताने भी नहीं दिये जाते हैं जिसे देखने वाला कोई नहीं है.काम करने वाले मजदूर जब इसकी शिकायत करते हैं तो उन्हें काम से निकाल देने की धमकी दी जाती है.

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