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बोकारो : गोमिया के दवार गांव में एक वर्ष से अधूरा है ONGC का सामुदायिक शौचालय

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Bokaro : ओएनजीसी के अधिकारी बोकारो शहर में पार्क, बस पड़ाव में सफाई कर और डस्टबीन लगाकर स्वच्छता का संदेश दे रहे है. लेकिन इनका सीएसआर विभाग एक से बढ़कर एक कारनामा बोकारो जिले में कर रहा है. वर्ष 2017 में गोमिया ब्लॉक के सियारी पंचायत के दवार गांव में स्वच्छ भारत मिशन को गति देने को लेकर सामुदायिक शौचालय की नींव रखी थी, लेकिन एक वर्ष से शौचालय अपूर्ण पड़ा हुआ है. जब देश की महारत्न कंपनी में शामिल ओएनजीसी देश के पीएम के सपने का इस तरह मजाक बनाएगी. इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, लेकिन चाहे चंदनकियारी ब्लॉक का पडुवा गांव हो या गोमिया का दवार दोनों जगह एक ही हालत देखने को मिल रही है.

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पंचायत के उप मुखिया को कर्ज में डुबो कर भागा एनजीओ

ओएनजीसी के सीएसआर विभाग ने बोकारो जिले के एनजीओ मछुवारा युवा मंच को शौचालय बनाने का जिम्मा दिया था. एनजीओ के संचालक ने पंचायत के उप मुखिया लालदीप सोरेन को कर्ज में डुबो कर भाग गया. सोरेन ने बताया कि संचालक ने ईंट, बालू, गिट्टी आदि का कुछ भी भुगतान नहीं किया, हर वक्त पैसा का रोना रोता रहा. कमरा ढलाई के बाद एक साल हो गया है, लेकिन उसका दर्शन नहीं हुआ, न ही कर्ज के पैसे की कोई चर्चा कर रहा है. ओएनजीसी के अधिकारी को भी इसकी जानकारी दी, लेकिन वे लोग गंभीर नहीं दिखे. वहीं गांव के लोग हर वक्त शौचालय को लेकर दवाब देते है, जिनसे ईंट, बालू ली है, उनकी बात अलग से सुनने को मिल रही है.

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अधूरा कमरा और अधूरी टंकी कर रही है हकीकत बयां

सियारी पंचयात के दवार गांव में महिलाओं के लिये छह और पुरुषों के लिये छह शौचालय, साथ में दो स्नानागार का निर्माण होना था. कमरा ढलाई के बाद अधूरा पड़ा हुआ है, वहीं शौचालय की टंकी भी अधूरी है, जिसमें बरसात का पानी भरा हुआ है. करीब 13 लाख की लागत से आधुनिक शौचालय का सपना गांव के लोगों को ओएनजीसी के अधिकारियों ने दिखाया था, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका. इस शौचालय के बन जाने से गांव में पानी की किल्लत भी दूर होती, क्योंकि इसमें एक डीप बोरिंग होना था.

 

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